लोकपाल का मसौदा संसद में पेश

नई दिल्ली, 9 दिसंबर, नससे. संसद के दोनों सदनों में शुक्रवार को बहुप्रतीक्षित लोकपाल विधेयक का मसौदा पेश किया गया. राज्यसभा में संसद की स्थाई समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी और लोकसभा में पिनाकी मिश्रा ने विधेयक का मसौदा पेश किया.

संवैधानिक दर्जे की सिफारिश – कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी द्वारा लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की मांग का समिति ने मान लिया है. जबकि प्रधानमंत्री को रखने या न रखने का फैसला संसद पर छोड़ दिया है. सिंघवी ने कहा कि लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश की गई है, जबकि प्रधानमंत्री को इसके दायरे में रखने का फैसला संसद पर छोड़ दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस बारे में तीन राय थी- प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखा जाए, नहीं रखा जाए और उन्हें शामिल करने का फैसला स्थगित कर दिया जाए. मसौदे की जांच अब केंद्रीय कानून मंत्रालय व केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा की जाएगी और फिर इसे संसद में चर्चा तथा पारित कराने के लिए लाया जाएगा. शीतकालीन सत्र 22 दिसम्बर को समाप्त हो रहा है.

जेठमलानी ने असहमति पत्र भेजा – लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी रिपोर्ट चार महीने बाद संसद में पेश की जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनेक महत्वपूर्ण मांगों को नजरअंदाज कर दिया गया है. अन्ना टीम की एक प्रमुख मांग निचली नौकरशाही को लोकपाल के दायरे में रखने की थी लेकिन स्थायी समिति ने इन सी और डी समूह के कर्मचारियों को लोकपाल की निगरानी के बाहर रखा है. करीब 30 सदस्यों वाली समिति में असहमति संबंधी 10 पत्र दर्ज कराए गए जिन्हें कांग्रेस के तीन सदस्यों और भाजपा के छह सदस्यों के पत्र शामिल है जबकि भाजपा के राम जेठमलानी ने अलग से असहमति पत्र भेजा है.

कांग्रेस के तीन सदस्य अहसमत – लोकपाल विधेयक पर विचार करने वाली संसद की स्थाई समिति में शामिल कांग्रेस के तीन सदस्यों ने इसकी रिपोर्ट से असहमति जताते हुए केंद्रीय सीवीसी, सीबीआई तथा ग्रुप सी के अधिकारियों को लोकपाल के तहत लाने की मांग की है. सत्तारूढ दल के तीन सदस्यों मीनाक्षी नटराजन. पी टी थामस और दीपा दासमुंशी ने अपने असहमति पत्र में यह मांग की है.  उन्होंने कहा है कि सीवीसी को लोकपाल के तहत तथा राज्य सतर्कता आयोग को लोकायुक्त के तहत लाया जाना चाहिए. इनकी राय है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सीबीआई की जांच को लोकपाल के निरीक्षण और नियंत्रण में लाया जाए. उन्होंने ग्रुप सी के अधिकारियों को समुचित प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए लोकपाल के तहत लाने का भी सुझाव दिया है. उन्होंने संविधान की धारा 311 को समाप्त करने या उसमें बदलाव करने की समिति की सिफारिश पर असहमति जताते हुए इसे रिपोर्ट से हटाने का आग्रह किया है.

झूठी शिकायत करने वालों के प्रति नरमी

लोकपाल के समक्ष भ्रष्टाचार के संबंध में झूठी शिकायतें दर्ज कराने वाले लोगों के प्रति स्थायी समिति ने नरम रवैया अपनाते हुए इन्हें कम सजा देने का सुझाव दिया है. रिपोर्ट में कहा है कि झूठी शिकायत करने वाले व्यक्ति को अधिक से अधिक छह माह के साधारण कारावास की सजा होनी चाहिए. ऐसे व्यक्ति के खिलाफ 25 हजार रूपये से अधिक का जुर्माना नहीं होना चाहिए. मूल विधेयक में झूठी शिकायत करने वाले को कम से कम दो वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष के कारावास की सजा तथा कम से कम 25 हजार और अधिकतम दो लाख रूपये के जुर्माने का प्रावधान है. शिकायत करने वाले व्यक्ति के लिए एक बचाव यह भी रखा गया है कि यदि शिकायत किसी दुर्भावना से न की गई हो तो उसे समुचित संरक्षण मिलना चाहिए.

खतरनाक हैं मनमोहन

अन्ना ने आरोप लगाया है कि सरकार भ्रष्टाचार मिटाने को लेकर गंभीर नहीं है. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने लिखकर दिया कि वो लोकपाल चाहते हैं. पीएम यदि चाहते तो मजबूत लोकपाल ला सकते  थे. ऐसा कमजोर प्रधानमंत्री होना देश के लिए खतरनाक है. यह पूछे जाने पर कि क्या टीम के सदस्यों का उन पर नियंत्रण है, अन्ना ने कहा, ‘मेरे बाल धूप से नहीं पके हैं, अनुभव से पके हैं. टीम अन्ना के सदस्यों पर उठने वाले सवालों पर अन्ना ने कहा, ‘हमारी टीम में कोई दोषी है तो सारी एजेंसियां आपकी (सरकार की) हैं, आप जांच करके उन्हें सजा दे सकते हैं.’ टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि अगर संसदीय समिति की सिफारिशों को लागू किया गया तो इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा. यह सीबीआई के कामकाज पर बुरा असर डालेगी.

केजरीवाल ने कहा, ‘कमेटी कहती है कि एनजीओ इसके दायरे में आने चाहिए, कंपनियां इसके दायरे में आनी चाहिए लेकिन प्रधानमंत्री और सांसद इसके दायरे में नहीं आएंगे, चपरासी इसके दायरे में नहीं आएंगे तो फिर इसके दायरे में आएगा कौन? सरकार ने एक बार फिर देश की जनता को धोखा दिया है. मैं देश के तमाम लोगों से अपील करता हूं वो रविवार को फिर से जंतर-मंतर पर आएं. किरण बेदी ने ट्विटर पर टिप्पणी करते हुए लिखा है, सीबीआई को लोकपाल के दायरे से बाहर रखकर नुकसान किया जा चुका है. अब लोकपाल बनाने का ही क्या औचित्य है? क्या संसद इसे पलटेगी? टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि लोकपाल बिल से भ्रष्टाचार कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ेगा. उन्होंने कहा, च्हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम देश के लोगों के ये बताएं कि स्टैंडिंग कमेटी ने कैसा बिल बनाया है. हमें भरोसा है कि देश की राजनीतिक पार्टियां संसद में स्टेंडिंग कमेटी द्वारा पेश बिल को नकार देंगी और जनहित में मजबूत जनलोकपाल लाएंगी.

भूषण ने कहा, च्यदि संसद ने मजबूत लोकपाल बिल नहीं पास किया तो हम फिर से प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे. इस बार प्रदर्शन लोकपाल तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि हमारे लोकतंत्र की बाकी खामियों को भी इसमें समाहित किया जाएगा. टीम के सदस्य कुमार विश्वास ने इसे बेहद कमजोर लोकपाल ड्राफ्ट करार दिया है. लोकपाल बिल पर स्थायी समिति की रिपोर्ट पेश होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने राहुल गांधी पर हमला बोला है. हजारे ने कहा है कि राहुल गांधी नहीं चाहते हैं कि भ्रष्टाचार रुके. उनका कहना है कि सरकार पर राहुल गांधी का दबाव है.

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