न्यूयार्क. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि मुद्रास्फीति में अभी तक गिरावट नहीं आई है। उन्होंने मुद्रास्फीति की दर को पांच फीसद से कम लाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई के लिए मुद्रास्फीति की दर में कमी लाना पहली प्राथमिकता है।

सुब्बाराव ने कहा कि चीजों के बढ़े दाम गरीब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में मुद्रास्फीति की जो दर बनी हुई है वह किसी सूरत से भी स्वीकार्य नहीं है इसको पांच फीसद तक लाना बेहद जरूरी है। उन्होंने माना कि यह लक्ष्य पाना बेहद कठिन है लेकिन जरूरी भी है। सुब्बाराव ने कोर्नेल विश्वविद्यालय में एक लेक्चर के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने माना कि जब तक मुद्रास्फीति की दर पांच फीसद से नीचे नहीं आ जाती है तब तक इसको नीचे लाने की सरकार की कोशिशें जारी रहेंगी। प्रमुख थोक सूचकांक में जुलाई के दौरान मुद्रास्फीति की दर 6.87 दर्ज की गई थी जो जून में 7.25 फीसद थी। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की पहली प्राथमिकता मुद्रास्फीति की दर को कम करना है। उन्होंने इसके लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी को सही बताया।

आरबीआई व सेबी ने आईडीआर पर दी ढील

मुंबई। निवेशक अब इंडियन डिपॉजिटरी रिसीट यानी आइडीआर को इक्विटी शेयरों में बदल सकेंगे। रिजर्व बैंक (आरबीआइ) और सेबी ने इससे संबंधित नियमों में ढील दे दी है।

वित्तीय क्षेत्र के इन दोनों नियामकों ने यह छूट देने के साथ ही आइडीआर के जरिये पाच अरब डॉलर तक की अधिकतम राशि वसूलने की सीमा बाध दी है। आरबीआइ ने सर्कुलर जारी कर यह सीमा तय की है। नियामकों के इस ताजा कदम से विदेशी कंपनिया भारतीय बाजारों में अपने आइडीआर उतारने के लिए प्रेरित होंगी। घरेलू स्तर पर तरलता बढ़ाने के लिए दोनों नियामकों ने खासतौर पर यह फैसला लिया है। इससे शेयर बाजार में विदेशी भागीदारी बढ़ेगी। इससे भारतीय शेयरधारक आइडीआर को जारी करने वाली कंपनी के शेयरों में बदल सकेंगे। देश में पहला आइडीआर ब्रिटेन का स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक मई, 2010 में लेकर आया था।

क्या है आइडीआर

आइडीआर भी ठीक उसी तरह है, जैसे भारतीय कंपनियों के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट (एडीआर) और ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट यानी जीडीआर हैं। विदेश से धन जुटाने के लिए देसी कंपनिया अपने शेयरों के बदले एडीआर और जीडीआर जारी करती हैं। इन डिपॉजिटरी रसीदों को संबद्ध स्टॉक एक्सचेंजों में शेयरों की ही तरह खरीदा-बेचा जाता है। वर्ष 2009 सरकार ने विदेशी कंपनियों को आइडीआर जारी करने की अनुमति दी थी। अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और नैस्डैक में 16 भारतीय कंपनियों के एडीआर का कारोबार होता है।

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