विधानसभा द्वारा 11 संशोधन विधेयक पारित

भोपाल, 2 दिसंबर.  मध्यप्रदेश विधानसभा ने आज 11 संशोधन विधेयकों को पारित कर दिया. इनमें से 4 संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया. संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा में अनेक सदस्यों ने भाग लिया. मध्यप्रदेश लोकसेवाओं के प्रदान की गारंटी (द्वितीय संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा के बाद लोक सेवा प्रबंधन राज्य मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि अधिनियम के लागू होने के बाद अब तक राज्य में 73 लाख से अधिक आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है.

इस अधिनियम के तहत मात्र एक प्रतिशत मामलों में आवेदन निरस्त किये गये है. उन्होंने कहा कि जून 2012 तक सभी विकासखण्ड स्तरीय कार्यालय में कम्प्यूटर और नेटवर्क की व्यवस्था के प्रयास किये जायेंगे, ताकि सभी पदाभिहित अधिकारियों के कार्यालयों में आनलाइन पंजीयन की व्यवस्था हो सकेगी. इसके अलावा राज्य सरकार प्रत्येक ब्लाक एवं नगरीय क्षेत्रो में लोक सेवा केन्द्रों की स्थापना का विचार भी कर रही है. इसके बाद सदन में संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया.

सहकारी सोसायटी संशोधन विधेयक- मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी (द्वितीय संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने बताया कि सहकारी साख सोसायटी के संचालक मण्डल के किसी सदस्य को तीन वर्ष से अधिक की कालावधि के लिये निरर्हित किये जाने के उपबंध को पुनस्र्थापित करने की दृष्टि से लाया गया है. साथ ही विधेयक में प्राथमिक सहकारी साख संरचना के कर्मचारी के लिये शास्ति की रकम कम करके 5 हजार रुपये करने का प्रावधान भी किया गया है. उनके उत्तर के बाद सदन ने संशोधन विधेयक को पारित कर दिया.

नगर तथा ग्राम निवेश- मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई ने सदन को बताया कि बढ़ते शहरीकरण तथा नई गृह निर्माण समितियों को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन विधेयक लाया गया है.साथ ही यह भी महसूस किया गया है कि इनके लिये पारदर्शी विधान एवं एक समान नीति होना चाहिये. जो आम जनता को भी सुविधाजनक लगे. विचार विमर्श के बाद संशोधन विधेयक में सभी के सुझावों को भी शामिल किया गया है .श्री विश्रोई के विधेयक को पारित कराने के अनुरोध पर सदन ने उस पर अपनी मोहर लगा दी.

भू-राजस्व संहिता- सदन ने राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा द्वारा लाये गये मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक को चर्चा के बाद पारित कर दिया. अपने उत्तर में वर्मा ने विपक्ष के इस आरोप को गलत बताया कि यह संशोधन विधेयक जल्दबाजी में लाया गया है. उन्होंने बताया कि नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर की अध्यक्षता में गठित कमेटी को प्राप्त सुझावों के बाद इसे लाया गया है. इस संशोधन विधेयक के बाद अब राजस्व मालों का तत्परतापूर्वक निराकरण हो सकेगा. भूमि का बाजार मूल्य कलेक्टर द्वारा जारी मार्गदर्शक सिद्घांतों के अनुसार अवधारित किया जायेगा. तहसीलदार राजस्व मामलों को अपने अधिनस्थ को अंतरिम नहीं कर सकेंगे. वर्मा ने बताया कि राजस्व मामलों कीसुनवाई केदौरान कोई पक्षकार यदि अपने प्रकरण में तिथि बढ़ाता है तो उसे शपथ पत्र देना होगा. यदि कोई पक्षकार तीन बार सुनवाई की तिथि बढाता है तो उसे उसका भुगतान करना पड़ेगा. पुनरीक्षण के आवेदन केवल राजस्व मंडल द्वारा सुने जा सकेंगे.अपील पुनर्विलोकन तथा पुनरीक्षण के लिये समय सीमा कम की गई है.

विक्रय का विनियम विधेयक- विधानसभा ने नगरीय प्रशासन एवं विकासमंत्री बाबूलाल गौर द्वारा लाये गये मध्यप्रदेश पथ पर विक्रय करने वालों की जीविका का संरक्षण और विक्रय का विनियम विधेयक को चर्चा के बाद पारित कर दिया. विधेयक पर हुई चर्चा के बाद गौर ने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में सडको के किनारे एवं फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले गरीबों के हितों को ध्यान में रखकर यह विधेयक लाया गया है.  विधेयक में पथ पर व्यवसाय करने वालों के लिये उपयुक्त स्थान तय करने तथा मास्टर प्लान व नगर विकास योजनाओं में उनके लिये स्थान सुरक्षित करने के प्रावधना रखे गये है.

नगर पालिक विधि संशोधन विधेयक- मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि द्वितीय संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा के बाद अपने उत्तर में नगरीय प्रशासन एवं विकासमंत्री बाबूलाल गौर ने बताया कि बजट सत्र मार्च 2010 में नगरपालिक विधियों में कालोनी निर्माण से संबंधित विभिन्न संशोधनों को मंजूरी दी गई थी. इन संशोधनों के कारण कालोनाइजर तथा बिल्डर कालोनी निर्माण में कठिनाई महसूस कर रहे थे. इसलिये प्रक्रिया के युक्तियुक्तकरण के उद्ïदेश्य से प्रावधानों को और सरल तथा प्रभावी बनाने की पहल की गई है.नये प्रावधान हो जाने से कालोनी निर्माण को गति मिलेगी, जिसका लाभ प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्र आय वर्ग को मिलेगा. उनके उत्तर के बाद सदन ने संशोधन विधेयक को पारित कर दिया.

कृषि उपज मंडी- मध्यप्रदेश कृषि उपजमंडी (तृतीय संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए किसान कल्याणमंत्री रामकृष्ण कुसमरिया ने सदन को बताया किइस विधेयक में अधिसूचित कृषि, जिसमें फल सब्जियां शामिल है को मण्डी प्रांगण से बाहर र्भी क्रय विक्रय का प्रावधान किया गया है. उन्होंने बताया कि मौजूदा अधिनियम में प्रसंस्करणकर्ता या प्रसंस्करण शब्द काल उल्लेख है. अब इसके साथ विनिर्माता शब्द भी स्थापित किया जा रहा है. इस विधेयक का उद्ïदेश्य यह भी है कि अब किसानों की अधिसूचित फसल (फल सब्जी) खराब नहीं हो सकेगी और वे इसे मण्डी के बाहर भी बेच सकेंगे. इससे प्रसंस्करण और विनिर्माण उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा. उनके उत्तर के बाद सदन ने संशोधन विधेयक को पारित कर दिया.

सिविल न्यायालय संशोधन विधेयक- मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा के बाद विधि और विधाई कार्य मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि विगत 10-15 वर्षो में भू सम्पत्ति के बाजार में अनेक गुना वृद्घि हुई है. भू सम्पत्ति के मूल्य वृद्घि के कारण बहुत कम संख्या में सिविल बाद व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो और एक के न्यायालय में फाइनल किये जा रहे क्योंकि उनकी धन संबंधित अधिकारिता की सीमा क्रमश: 25 हजार एवं 50 हजार रुपये तक है.

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