बरसात को खत्म हुये कुछ समय हो चुका है. लेकिन राज्य की सड़कें बदहाली में है. इंदौर- भोपाल जैसे स्टेट वे की भी यह हालत है कि लोग सड़क मार्ग के स्थान पर रेलों आना-जाना कर रहे हैं. यह स्थिति राज्य भर में है कि सड़कों के मरम्मत न होने से उस पर यात्रा करने पर लोगों की ही मरम्मत हो जाती है. एक समय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी इनकी दुर्दशा पर यह कह चुके है कि इन पर यात्रा करने से तो कसरत हो जाती है. वे केंद्र सरकार के मंत्री श्री कमलनाथ से भी भिड़ गये कि राज्य में नेशनल हाईवे उखड़ गये है और केंद्र उनकी मरम्मत नहीं कर रहा है. मंत्रीगण इस मुद्दे पर आंदोलन पर उतारू हो गये थे.

अभी प्रदेश में सरकार द्वारा विभागीय स्तर पर और ठेकेदारों द्वारा भी सड़क मरम्मत का काम किया जा रहा है. राज्य के लोक निर्माण मंत्री श्री नागेंद्र सिंह ने कहा  है कि गत 3 महीनों में बरसात के बाद 6 हजार 42 किलोमीटर लंबाई की सड़कों की मरम्मत का काम पूरा कर दिया गया है. इसके साथ ही 190 किलोमीटर सड़कों  का नवीनीकरण का काम किया गया. राज्य में 12 हजार किलोमीटर सड़कों की मरम्मत की जानी है. इस हिसाब से अभी आधा काम हुआ है और बाकी पर काम शुरू किया जा रहा है. इनमें से 972 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत ठेकेदारों के कराई जा रही है. राज्य में पर्यटन व उद्योग लगाने की कई योजनाएं बनायी गई है. इनमें सबसे बड़ी बाधा सड़कों की दुर्दशा है. बरसात में 4 महीनों तक सड़क उधड़ती है और उसके अगले 6 महीनों तक उसकी मरम्मत चलती है. इस अनुमान में राज्य सड़क परिवहन केवल दो महीने ही ठीक-ठाक चल जाता है. अब वाहनों का दबाव और लोगों का आवागमन इतना ज्यादा बढ़ गया है कि उसके अनुरूप  सड़कों का निर्माण व मरम्मत दोनों नहीं है. हर साल की मरम्मत से पैसा फूंकने से ज्यादा सस्ता और अच्छा यही रहेगा कि सभी जगहों पर सीमेंट कांक्रीट की सड़कें बना दी जाए. रेलवे की तरह सड़कों के सेक्शन बनाकर उनकी सतत् मरम्मत व रखाव चलते रहना चाहिए. तभी राज्य मे 12 महीनों वाहन और लोग आ-जा सकेंगे और उसी दशा में विकास होगा.

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