भोपाल,19 मई, मध्यप्रदेश में जलाभिषेक अभियान में सूख चुकी नदियों को पुनर्जीवित करने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अनूठे कार्यक्रम में जन-भागीदारी से सफल परिणाम हासिल हुए हैं. अब खरगोन जिले की रामकोला, रतलाम जिले की जामड़ और पन्ना जिले की मिढ़ासन नदी का पुनर्जीवन हो गया है.

इससे पहले आमतौर पर अक्टूबर-नवम्बर माह आते-आते नदियों का पानी सूख जाता था. नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन से इन नदियों के आसपास के इलाकों में भू-जल स्तर बढ़ा है. कुओं और ट्यूबवेल तथा तालाबों के जल-स्तर में वृद्धि होने से सिंचाई रकबे में भी बढ़ोत्तरी हुई है. इसके साथ-साथ वनीकरण और चारागाह विकास योजनाओं को फायदा पहुँचा है. फसल उत्पादन बढऩे से किसानों की आर्थिक स्थिति और बेहतर हुई है.कार्यक्रम देश के सभी 50 जिलों में एक-एक नदी का चयन किया गया है. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित जल-ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन की तीन वर्षीय इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन पर करीब 1,056 करोड़ रुपये खर्च होंगे. अब तक नदी पुनर्जीवन कार्यों पर करीब 142 करोड़ 25 लाख रुपये व्यय किये जा चुके हैं. इसमें करीब 10 करोड़ रुपये जन-भागीदारी से मिले हैं. कार्यक्रम में शामिल नदियों के कुल 6.19 लाख हेक्टेयर केचमेंट और अपस्ट्रीम क्षेत्र में जल-संरक्षण तथा भू-जल संवर्धन कार्य किये गये हैं.कार्यक्रम के अंतर्गत जिन 50 नदियों को शामिल किया गया है इनेक  पुनर्जीवन का कार्यक्रम शुरू किया गया है.

की मिढ़ासन, छतरपुर की श्यामरी, बैतूल की पूरना, सिवनी की सागर, धार की नालछा, बड़वानी की देव, रायसेन की तेन्दौनी, उमरिया की उमरार, दमोह की कोपरा, खण्डवा की कालधई, अलीराजपुर की डोही, राजगढ़ की गाढग़ँगा, शाजापुर की भाटन, कटनी की कटनी, रतलाम की जामड़, छिन्दवाड़ा की पथरई और अनूपपुर की बाकन नदी तथा इंदौर जिले में स्थित क्षिप्रा नदी का उद्गम क्षेत्र शामिल है. इसी तरह मुरैना की क्वांरी नदी, गुना की बूढ़, जबलपुर की हिरन, नरसिंहपुर की सींगरी, शिवपुरी की पार्वती, भोपाल की कोलांस, विदिशा की सिंध, नीमच की बोरखेड़ी, बुरहानपुर की मिठिया, श्योपुर की सींप, दतिया की अनहोरी, सीहोर की कोलांस, मण्डला की कुकरा, सागर की गदेरी, शहडोल की हलफल, अशोकनगर की लीलठ, ग्वालियर की महुअर, देवास की पर्यटी तथा बालाघाट की तन्नोर नदी के इसके साथ ही कुछ जिलों में बड़े नालों को पुनर्जीवित किया जा रहा है. इनमें टीकमगढ़ जिले में पटेरिया नाला, सतना में आम्हा, मंदसौर में करनाली, सीधी में धुन्ना, होशंगाबाद में बरगाह, सिंगरोली में बरदिया, हरदा में अरबा और रीवा में सेतुबंध तथा उज्जैन जिले का सिलारखेड़ी नाला शामिल है.

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