राज्य के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने द्वितीय शासन काल के तीन वर्ष पूरे कर लिये हैं. दो साल बाद 2013 में उन्हें फिर से चुनाव में जाना है. उनका दूसरा कार्यकाल 12 दिसंबर 2008 को प्रारंभ हुआ. मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवेश से आये हैं और उन्होंने अपने आप को हमेशा ग्रामीण के रूप में सरकार में भी प्रस्तुत किया है.

सरकार ने उपलब्धियों में अपने ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को उल्लेखित किया है कि उनके सुचारू क्रियान्वयन से राज्य के समग्र विकास के साथ-साथ, ग्रामीण जनजीवन में खुशहाली और सुखद बदलाव आया है. ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा के तहत राज्य में लगभग 18 हजार करोड़ रुपये खर्च किये गये. इसमें 10 लाख कार्य संपन्न कराये, जिसमें ग्रामीण मजदूरों को एक लाख 31 हजार करोड़ मानव दिवस का रोजगार मिला. ग्रामीण सड़क परियोजना में मध्य प्रदेश ने देश भर में सभी राज्यों में सबसे आगे रहने का गौरव प्राप्त कर लिया है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत लगभग 48 हजार किलोमीटर लंबी 10 हजार 2080 ग्रामीण सड़कों का निर्माण हुआ है. इन पर 11 करोड़ रुपये खर्च हुये. इनमें लगभग 10 हजार गांव बारहमासी सड़कों से जोड़े जा चुके हैं. भ्रष्टाचार के ज्वलंत मुद्दे पर भी चौहान सरकार ने कारगर कदम उठाये हैं. इस संबंध में भी मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां यह कानून बनाया गया कि भ्रष्टाचार के मामलों में तुरंत कार्यवाही के लिये अदालतें बनायी जायेंगी और दोषियों ने भ्रष्टाचारी तरीकों से जो संपत्ति बनाई होगी उसे जब्त कर लिया जायेगा.

चौहान सरकार ने त्वरित प्रशासन की दिशा में ऐसा कदम उठाया है, जिसे अन्य राज्यों द्वारा भी मध्य प्रदेश के नमूने की तरह अपनाया जा रहा है. राज्य सरकार ने जन सेवा गारंटी अधिनियम बनाया है. वर्तमान में इसके तहत जनता को 51 शासकीय काम निश्चित समय सीमा में करके देने होंगे अन्यथा दोषी कर्मचारी या अधिकारी पर आर्थिक दंड लगेगा. इसमें शासन की और अधिक सेवाओं को भी जोड़ा जायेगा. इस संदर्भ में राज्य में लोक सेवा केंद्र खोले जायेंगे, जिनमें लोग अपने काम के लिये कागज सौंपेंगे और उस केंद्र के अधिकारी निश्चित अवधि में उन कामों को करायेंगे. इससे लोगों को विभिन्न दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

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