मॉस्को, 23 दिसंबर. भारत ने रूसी अधिकारियों से हिंदू ग्रंथ भगवद् गीता पर बैन लगाने की मांग को लेकर उठे विवाद को सही ढंग से सुलझाने की अपील की है और कहा कि यह महज एक धामिर्क ग्रंथ नहीं बल्कि भारतीय सोच को परिभाषित करने वाली किताबों में से एक है.

क्रिश्चन ऑथोर्डोक्स चर्च से जुड़े एक समूह के भगवद् गीता को चरमपंथी बताने और इस पर बैन लगाने की मांग पर रूस में भारत के राजदूत अजय मल्होत्रा ने कहा कि मामले को सही ढंग से सुलझाने के लिए उच्च स्तर पर रूसी अधिकारियों से बात की गई है. साइबेरिया के कोर्ट में मामले की अंतिम सुनवाई 28 दिसंबर को होनी है. कोर्ट तोम्स्क इलाके में मानवाधिकार मामलों के रूसी लोकपाल और मास्को, सेंट पीटरबर्ग के भारतविदों की राय जानने को तैयार हो गई. इन सभी ने मामले को खारिज करने की सलाह दी है. एक बयान में मल्होत्रा ने कहा कि भगवद् गीता दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित ग्रंथ है. इसका पहली बार रूसी भाषा में 1788 में अनुवाद हुआ. यह महज एक धामिर्क ग्रंथ नहीं बल्कि भारतीय सोच को परिभाषित करने वाली किताबों में से एक है. भारतीय राजदूत ने कहा कि विद्वान रूसी और अन्य विशेषज्ञों ने किताब के समर्थन में तर्क प्रस्तुत किए हैं और उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत इसकी सराहना करेगी.

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