ग्वालियर किले पर ध्रुपद समारोह होगा : लक्ष्मीकांत शर्मा

ग्वालियर, 9 दिसम्बर. संगीत की नगरी ग्वालियर में सुर सम्राट तानसेन की स्मृति में प्रतिष्ठापूर्ण चार दिवसीय ”तानसेन समारोह” आज से शुरू हुआ.

भव्य समारोह में बनारस घराने की मूर्धन्य शास्त्रीय संगीत गायिका सुश्री सविता देवी को इस वर्ष के ”राष्ट्रीय तानसेन सम्मान” से विभूषित किया गया.
जल तरंगों से घिरे बैजाताल के खुले रंगमंच पर शुक्रवार की शाम आयोजित हुए भव्य एवं गरिमामय समारोह में राज्य सभा सांसद श्री प्रभात झा, संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा तथा वित्त मंत्री श्री राघव जी ने सुविख्यात गायिका सुश्री सविता देवी को इस सम्मान से अलंकृत किया. भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में मध्यप्रदेश शासन द्वारा सुर सम्राट तानसेन के नाम से स्थापित सर्वोच्च राष्ट्रीय अलंकरण के रूप में सुश्री सविता देवी को दो लाख रूपए की राशि, प्रशस्ति पट्टिका व शॉल, श्रीफल भेंट किए गए. संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने इस मौके पर कहा कि संगीत कला पारखी ग्वालियर के महाराजा मानसिंह की स्मृति में ग्वालियर किले पर ध्रुपद समारोह आयोजित किया जायेगा.

इसकी तिथियां भी जल्द ही घोषित की जायेंगी. उन्होंने कहा कि कला एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. साथ ही कार्यक्रमों के विकेन्द्रीयकरण के माध्यम से कला एवं संस्कृति को गाँव-गाँव तक पहुंचाने का प्रयास भी प्रदेश सरकार बडी शिद्दत के साथ कर रही है. उन्होंने समारोह में मौजूद संगीत रसिकों से आह्वान किया कि कला एवं संस्कृति को बचाने के लिये  युवा पीढी को इससे जोडें. इस अवसर पर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के अध्यक्ष श्री जय ङ्क्षसह कुशवाह, ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री रविन्द्र ङ्क्षसह राजपूत, महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, राज्य पाठ्य पुस्तक निगम के उपाध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, संभागायुक्त श्री एस बी ङ्क्षसह, महाराजा मानङ्क्षसह विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य चितरंजन ज्योतिषी एवं संचालक संस्कृति श्रीयुत श्रीराम तिवारी मंचासीन थे. पहली बार ऐतिहासिक बैजाताल के मध्य में बने विशाल एवं आकर्षक मंच पर पहली बार आयोजित हो रहे तानसेन संगीत समारोह में ब$डी संख्या में संगीत रसिक जमा हुए. समारोह के मुख्य अतिथि श्री प्रभात झा ने कहा कि कला एवं संस्कृति बचेगी तो देश बचेगा और देश बचेगा तभी हरेक नागरिक बचेगा. इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की उन्होंने सराहना की. उन्होंने कहा कि संगीत में वो ताकत होती है कि जिससे निर्जीव वस्तु भी सजीव हो उठती है. इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज बैजाताल के आभा को देखकर मिल रहा है. बैजाताल में विशाल जन समूह की मौजूदगी संगीत समारोह की वजह से ही संभव हुई है. श्री झा ने कहा कि संगीत की चेतना लौटाने के प्रयास मिलजुलकर करने होंगे. केवल सरकार के प्रयासों से ही यह संभव नहीं होगा. आप सब के द्वारा दिए गए प्रोत्साहन से ही कला एवं संस्कृति का पोषण संभव है.

वित्त मंत्री श्री राघव जी ने तानसेन अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि प्रदेश में अब कला की परख हो रही है. सरकार  अपने प्रदेश के ही नहीं सम्पूर्ण राष्ट्र यहां तक अन्य देशों के कलाकारों को सम्मानित करने में विश्वास रखती है . श्री राघव जी ने कहा कि ग्वालियर की धरती के कण-कण में स्वर लहरियां फूटती हैं. इसी माटी ने संगीत सम्राट तानसेन को जन्म दिया, जिनकी वजह से ग्वालियर की पहचान विश्व स्तर पर कायम हुई . उन्होंने कहा कि जब तक पृथ्वी का अस्तित्व रहेगा तब तक गान मनीषी तानसेन को याद किया जाता रहेगा . श्री राघवी जी ने कहा कि ग्वालियर शास्त्रीय संगीत कला पारखियों की नगरी है . अलंकरण समारोह की प्रस्तावना पर प्रकाश डालते हुए संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि ‘ तानसेन समारोह ‘ को और भव्य बनाने में प्रदेश सरकार कोई कसर नहीं रखेगी . उन्होंने कहा कि अगले वर्ष के ‘ तानसेन समारोह ‘ को भी और गरिमा प्रदान करने के लिये स्थानीय आयोजन समिति से सुझाव लिये जायेंगे. उन्हांने संभाग आयुक्त से कहा कि समारोह उपरांत स्थानीय आयोजन समति की बैठक आयोजित कर  ‘ तानसेन समारोह ‘ के संबंध में सुझाव लेलें, ताकि इन सुझावों पर अमल कर तानसेन समारोह को और भव्यता प्रदान की जा सके. श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश सकरार ने ग्वालियर में देश का दूसरा संगीत विश्वविद्यालय खोला है .

सम्मान समारोह के बाद तानसेन समारोह की पहली संगीत सभा की विधिवत  शुरूआत हुई. संगीत सभा का आगाज माधव संगीत महाविद्यालय के द्वारा प्रस्तुत ध्रुपद गायन से हुआ. इसके बाद इस वर्ष के तानसेन सम्मान से अलंकृत सुविख्यात गायिका सुश्री सविता देवी ने बनारस घराने के पंडित बडे रामदास की रचना बसंत राग में प्रस्तुत की. जिसके बोल हैं ”सरसंग कोटि रयो बगियन फुलवारी आई सखी बसंत आयो कोकन लगी कोयलिया”. उन्होंने इसके बाद ठुमरी – ”सैया न मानूँगी उनके मनाये” प्रस्तुत कर संगीत रसिकों को भाव विभोर कर दिया. . देर रात तक ब्रम्हनाद के साधकों ने स्वर लहरियां बिखेरी. सुर और ताल से सजी महफिल में ग्वालियर के सुधीय रसिक जनों ने करतल ध्वनि के साथ संगीत कला को सराहा.  आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर तानसेन सम्मान एवं संगीत समारोह का शुभारंभ किया. इस अवसर पर माधव संगीत महाविद्यालय के आचार जनों और विद्याथयो ने तानसेन रचित प्रशस्ति का गायन किया. अतिथियों ने समारोह के अंत में कुमकुम माथुर के भित्त एवं राग रागिनियों पर किए गए तुलनात्मक अध्ययन पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन किया गया.

तानसेन  समारोह में  आज

तानसेन  समारोह की पहली प्रात:कालीन सभा बैजाताल के तैरते हुए रंगमंच पर १० दिसम्बर को प्रात:काल १० बजे से शुरू होगी. सभा की शुरूआत तानसेन संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी. इसके बाद हिना कालगाँवकर ग्वालियर का ध्रुपद गायन होगा. इस सभा में श्री अभय सोपोरी, नई दिल्ली का संतूर वादन, श्री व्यंकटेश कुमार, धारवाड का गायन व श्री आशीष सांकृत्यायन का ध्रुपद गायन होगा. पहली प्रात:कालीन सभा की अंतिम प्रस्तुति में श्री रफीउद्दीन साबरी, नई दिल्ली का एकल तबला-वादन होगा. इस  दिन सायंकालीन सभा सायंकाल ६ बजे शुरू होगी. सभा की शुरूआत भारतीय संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी. इसके पश्चात ख्याल केन्द्र भोपाल का गायन होगा. इस सभा में श्री कुमुद झा दीवान, नई दिल्ली का गायन, श्री मोहिउद्दीन खाँ, जयपुर का सारंगी-वादन, सुश्री आरती अंकलीकर टिकेकर, मुंबई का गायन और श्री एच. सईदउद्दीन डागर, पुणे का ध्रुपद गायन होगा.

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