वर्तमान 15वीं लोकसभा के शरद कालीन सत्र को लोकपाल सत्र की संज्ञा से याद रखा जायेगा. वैसे लोकपाल विधेयक गत 40 वर्षों से संसद में लटकाया जा रहा था, लेकिन अन्ना हजारे ने इस मामले में सरकार व संसद दोनों को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है. इस सत्र में उसे इस पर निर्णायक निर्णय करना ही होगा, वर्ना अन्ना हजारे फिर अनशन पर बैठने की घोषणा पर डटे हुये हैं.

सत्र 22 नवंबर 2011 से शुरू होकर 21 दिसंबर तक चलेगा. लोकपाल विधेयक के मसले पर कांग्रेस सांसद व महासचिव श्री राहुल गांधी के सुझाव के पहले तक यही मांग बनी रही कि ‘सशक्त’ लोकपाल विधेयक होना चाहिये. अब यह इरादा जाहिर कर दिया गया है कि सरकार की मंशा इस मसले पर संविधान संशोधन के जरिये लोकपाल व उसके आयोग को संवैधानिक पद और संवैधानिक संस्था बनाना है. जब विधेयक प्रस्तुत होगा तभी स्थिति स्पष्ट हो जायेगी. लोकपाल विधेयक की तरह संसद में महिला आरक्षण विधेयक भी ‘आम सहमति’ की कुटिल राजनीति में लटकाया जा रहा है. इस सत्र में उसे लाया जायेगा इसकी अभी तक कोई चर्चा या संभावना नजर नहीं आ रही है. संभवत: इसके लिये भी कि महिला नेत्री या जन नेता को अनशन पर बैठना पड़ेगा.

इस विधेयक पर सभी दलों में महिलाओं के प्रति पुरुष वर्ग का दुराग्रह ही नजर आता है वहीं इस पर सभी दलों की महिला सांसद एकजुट है. सत्ताधारी यूपीए और प्रमुख विपक्षी भारतीय जनता पार्टी व वामपंथी पार्टियां सभी इस महिला विधेयक के पक्ष में हैं. तब भी न जाने ऐसी क्या मजबूरी है कि यह विधेयक अभी तक निर्णायक नहीं हो पा रहा है. अन्ना ने लोकपाल विधेयक पर संसदीय की अडंगेबाजी को खुली चुनौती देकर अप्रभावी बनाकर लोकपाल पर राष्ट को एक सूत्र में बांध दिया है. हर सत्र का एक एजेंडा होता है, लेकिन इस सत्र का सबसे बड़ा व सभी का सरकार व विपक्ष दोनों का एक ही सर्वमान्य एजेंडा ‘भ्रष्टाचार’ होगा. सरकार भी भ्रष्टाचार मिटाने के लिये संकल्प ले रही है और इस मुद्दे को विपक्षी दल भी मुख्य मुद्दा बनाये बैठे हैं. सभी अपने आप को भ्रष्टाचार विरोधी होने की प्रतिस्पर्धा में व्यस्त रहेंगे. महंगाई के मुद्दे पर गत सत्र में भी स्थगन प्रस्ताव के जरिये चर्चा करने पर हंगामा चलता रहा था. इस बार भी वही कवायद फिर की जाने की पूरी संभावना है. महंगाई पर विपक्ष व पक्ष दोनों के भाषण होंगे. विपक्ष इसे सरकार की असफलता कहेगा और सरकार इसे अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक स्थिति, यूरो जोन का आर्थिक संकट आदि का परिणाम बतायेगी. गत सत्र और इस सत्र के बीच में प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह कांस (फ्रांस) में जी-20, माले में सार्क तथा बाली (इंडोनेशिया) व सिंगापुर में आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलनों में भाग लेकर आ चुके हैं. उस पर भी प्रधानमंत्री का वक्तव्य होगा.

लोकसभा, अध्यक्ष श्री मीरा कुमार पूरी तरह से प्रयासरत है कि लोकसभा का सत्र सुचारू रूप से चले. महंगाई का मुद्दा तो पिछले कई सत्रों से चला ही आ रहा है और तमाम चर्चाओं के बाद भी महंगाई चलती चली ही जा रही है. सरकार व विपक्ष इस पर कुछ भी सार्थक कर नहीं पाये हैं. भाजपा नेता श्री आडवानी ने भी सत्र से पूर्व ही उनकी भ्रष्टाचार विरोधी मुहीम का समापन 22 राज्यों की यात्रा के बाद कर दिया है. अब वे भ्रष्टाचार को लोकसभा में मद्ïदा बनायेंगे. लोकपाल के संदर्भ में यह सत्र एक
यादगार रहेगा.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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