चौहान के दामन में न दाग है, न विवाद

म.प्र. के विभिन्न क्षेत्रों से, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीन दिन के उपवास की समाप्ति पर मध्यप्रदेश से यह आम राय सामने आ रही है कि भाजपा से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी में नरेन्द्र मोदी के मुकाबले म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्यादा तवज्जो देना चाहिए. मध्यप्रदेश में मोदी के उपवास को यहां की राजनीतिक धारा में नौटंकी करार दिया जा रहा है.

‘नवभारत टीम द्वारा प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में कराए गए सर्वे में आम आदमी, राजनीतिक विश्लेषक, बुद्धिजीवी और भाजपा विचारधारा के लोगों का यह मानना है कि नरेन्द्र मोदी के मुकाबले मुख्यमंत्री शिवराजसिंह को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर ज्यादा सशक्त उम्मीदवार माना जा रहा है. म.प्र. में लोकप्रियता की परीक्षा को शिवराज हर बार बेहतर अंकों के साथ ‘उत्तीर्ण करते जा रहे हैं. नरेन्द्र मोदी को ‘सद्भावना के बैनर के नीचे उपवास-नौटंकी इसीलिए करना पड़ी, क्योंकि अनेक बहुचर्चित विवाद उनके दामन पर धब्बों के रूप में हैं.  दिल्ली-फतह में ये ‘जख्म बड़े अवरोध हैं, जबकि शिवराज सिंह ऐसे नेता हैं, जिनका दामन विवादों से एकदम साफ है.

आम राय में लोगों ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेता पूर्व में इस तरह की बात सामने आने पर स्पष्टï शब्दों में कह चुके हैं कि मोदी के अलावा अन्य दावेदार भी भाजपा के पास हैं. उनमें से एक शिवराज का भी उन्होंने प्रमुखता से उल्लेख किया है.  मोदी का शासनकाल साम्प्रदायिक दंगों से भरा है, जबकि शिवराजसिंह चौहान का कार्यकाल साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल के तौर पर पूरे देश में गिनाया जाता है. जहां तक विकास के मुद्दे की बात है म.प्र. ने राष्ट्रीय राजनीति में विकास के सहारे चुनाव जीतने का उदाहरण पेश किया है. विकास का आसरा लेकर ही यहां प्राय: हर उपचुनाव में भाजपा को सफलता मिलती रही है.

जबकि गुजरात में हो रहे स्थानीय निकाय चुनाव में ही अनेक जगह कांग्रेस ने बाजी मार ली है. लोगों का यह भी मानना है कि म.प्र. के गांवों में शिवराज का एकतरफा जादू चलता है. वे यहां बच्चों के ‘मामा के तौर पर जाने जाते हैं. म.प्र. में लोक सेवा गारंटी अधिनियम से लेकर लाड़ली लक्ष्मी और नदी पुनर्जीवन जैसी अनेक योजनाएं हैं, जो समग्र विकास और सुशासन का आधार तैयार करती हैं. अभी हाल ही में मुस्लिमों ने एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर उनका अभिनंदन किया है, जो राष्ट्रीय सुर्खियों का विषय बना.

बतौर वक्ता भी शिवराजसिंह चौहान मोदी के मुकाबले कम नहीं हैं. आम लोगों की राय में एक बिंदु यह भी सामने आया कि ‘मोदी-स्टाइल में अकेले मोदी ही होते हैं, बाकी नेताओं को वे बौना समझते हैं, जबकि शिवराजसिंह- सबको साथ लेकर चलते हैं, जिसकी आज भाजपा को सख्त जरूरत है.

मुहीम को पलीता…!
नई दिल्ली, 19 सितंबर. भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी की तर्ज पर राजग के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने का ख्वाब शायद ही पूरा हो पाए. प्रधानमंत्री के दावेदारी की प्रबलता शुरू होते ही राजग के बडे घटक जदयू ने इसमें सेंधमारी कर दी है. जदयू अध्यक्ष व राजग संयोजक शरद यादव ने परोक्ष रूप से नरेन्द्र सिंह मोदी की भूमिका को खारिज कर दी है. हालांकि भाजपा ने जदयू के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि उनका बयान गठबंधन के लिए ठीक नहीं है. जदयू को मोदी के नाम पर सहमति की बात तो दूर उनके नाम लेने से भी परहेज है. राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि अगर जदयू मोदी से किसी भी तरह का संपर्क रखता है तो उसका बिहार में बंटाधार हो सकता है. मोदी के सद्भावना के नाम पर उपवास के बाद इस तरह के अटकलें लगाई जा रही है.

कि वे 2014 के लोकसभा चुनाव में आडवाणी की तर्ज पर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं. इतना ही नहीं उपवास स्थल पर राजग के कुछ सहयोगी दलों के नेताओं और शिवसेना के मोदी के पक्ष में उतरने के बाद इसे और आधार मिल गया है . लेकिन जद यू अध्यक्ष शरद यादव द्वारा उनके उपवास का अप्रत्यक्ष उपहास उड़ाने के बाद यह साफ हो गया कि मोदी के नाम से अभी भी जद यू को परहेज है. दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री व जद यू के वरिष्ठï नेता नीतीश कुमार ने मोदी पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है. वहीं पार्टी नेता शिवानंद तिवारी ने मोदी के नाम को साफ खारिज कर दिया. राजनीतिक प्रेक्षकों का भी साफ मानना है कि मोदी से संपर्क से जद यू को आगामी लोकसभा चुनाव में काफी घाटा हो सकता है. उनका तर्क है कि बिहार में 16 से 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता है. मोदी से करीब आने पर यह मतदाता जद यू के विरोध में संगठित होकर जा सकता है. ऐसे में प्रदेश में जद यू के लिए मुसीबते खड़ी हो सकती है. जद यू के एक वरिष्ठï महासचिव ने भी इसे स्वीकारते हुए कहा कि अगर जनता में यह संदेश जाता है कि पार्टी मोदी के नाम पर अपनी सहमति दे सकता है तो अल्पसंख्यक मतदाता इसके खिलाफ लामबंद हो सकते हैं.

उपवास किया खत्म

अहमदबाद, 19 सितंबर. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार शाम करीब सवा छह बजे अपना उपवास तोड़ दिया। उन्होंने सभी धर्मों के संतों के हाथों नींबू-पानी और जूस पीकर तीन दिन का व्रत खत्म किया। इसके बाद मोदी ने अपने भाषण में कहा कि उपवास भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन सद्भावना मिशन जारी रहेगा। हालांकि मोदी के उपवास के साथ कई विवाद भी जुड़ गए। राज्य में उपवास युद्ध पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शिवसेना ने तीखा कटाक्ष किया है।

अल्पसंख्यकों का झटका- मुस्लिमों का समर्थन जुटाने की कोशिश करते दिख रहे नरेंद्र मोदी को आज मुसलमानों ने भी झटका दिया। खेड़ा गांव के एक इमाम ने उन पर बेइज्जती करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मोदी ने उनके हाथों टोपी का तोहफा स्वीकार नहीं कर उनका अपनमान किया।

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