अरब राष्ट्र लीबिया में विद्रोह की स्थिति गहराती जा रही है और विद्रोही राजधानी त्रिपोली में घुस गए हैं. सैन्य कमांड के पास भारी गोलाबारी हो रही है. लीबिया के सत्ता संघर्ष को गृहयुद्ध तो अब नहीं कहा जा सकता है. यहां विदेशी हमले हो चुके हैं. विद्रोहियों को विदेशी सैन्य मदद पहुंच रही है.

अमेरिकी राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा सहित अन्य राष्ट्राध्यक्ष कर्नल गद्दाफी से सत्ता छोड़ देने को कह रहे हैं. अभी लीबिया में विदेशी फौजों ने प्रवेश नहीं किया है. ऐसी हालत सीरिया में भी बनी हुई है. वहां सत्ता और विद्रोहियों के बीच बाकायदा युद्ध स्तर पर युद्ध हो रहा है. वहां भी अंतरराष्ट्ररीय समुदाय सीरिया में फौरन खून खराबा रोकने की अपीलें कर रहा है. कर्नल गद्दाफी के बारे में भ्रामक समाचार आ रहे हैं कि वह देश छोड़कर भाग चुके हैं और उनके लड़के पकड़े गए हैं. उनका एक लड़का तीन दिन बाद लौटा है. वे स्वयं पिछले हफ्ते से दिखाई नहीं दिए हैं. कर्नल गद्दाफी 1969 सैनिक क्रांति कर सत्ता में आए थे. तभी से लगातार पद पर कायम हैं. मिस्र अमेरिका सहित कई देश लीबिया की विद्रोही सरकार को मान्यता दे चुकी है.

अरब राष्ट्ररों में सत्ता परिवर्तन और सत्ता में विद्रोह की लहर ट्यूनीशिया में भड़की और वहां कुछ ही दिनों में सत्ता परिवर्तन हो गया. लेकिन यहां की चिंगारी दूसरे अरब राष्ट्ररों में शोला बन गई. सबसे बड़ा परिवर्तन ईजिप्त में आया जहां अनवर सादात के बाद हुस्नी मुबारक 35 सालों से लगातार राष्ट्रपति बने हुए थे. इन दिनों उन पर मुकदमा चल रहा है. साथ ही वहां जो सैनिक दस्ता सत्ता संभाले है उसके खिलाफ भी दूसरा विद्रोह हो रहा है. उनसे संविधान और प्रजातंत्रीय प्रणाली लागू करने को कहा जा रहा है.

अनेक अरब, अफ्रीकी व लेटिन अमेरिकी राष्ट्ररों में सैन्य सत्ता पलट का इतिहास चला आ रहा है. जो भी सत्ता में राष्ट्रपति बनकर आता है वहां बरसों डटा रहता है और जीवन भर के लिए सत्ता में बना रहना चाहता है. क्यूबा में भी फिडिल कास्ट्रो लगातार सत्ता में रहे. अब उनके भाई राल्फ कास्ट्रो राष्ट्रपति हैं. वहां राष्ट्रपति का कार्यकाल निश्चित किया जायेगा.

लीबिया का तेल यूरोपीय देशों को सबसे सस्ता पड़ता है. भूमध्य सागर के दक्षिण में बसे लीबिया से पेट्रो तेल एक ही दिन में बहुत कम भाड़े में जहाज से पहुंच जाता है. ऐसे अनुमान लग रहे हैं कि गद्दाफी ने भूमध्य सागर के द्वीप राष्ट्रर माल्टा में शरण लेनी चाही थी लेकिन वह यूरोपीय व ईसाई वासी होने के नाते इसके लिए तैयार नहीं है. दूसरा अनुमान यह है कि वह अलजीरिया पहुंच चुका है.

अमेरिका व यूरोपीय राष्ट्ररों को यह तो भरोसा हो गया है कि गद्दाफी की सत्ता का अंत हो ही रहा है. लेकिन जैसा कि अरब राष्ट्ररों में होता आ रहा है कि सत्ता पलटने पर सत्ता के कई दावेदार सत्ता के लिए आपस में लडऩे लगते हैं. इस समय मिस्र में यही स्थिति है. वहां सत्ता संघर्ष हो रहा है. अन्य राष्ट्रर लीबिया में तुरंत सैनिक सहयोग से नई सरकार जमा देना चाहते हैं.

Related Posts: