2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला

मुंबई, 3 फरवरी.. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के इस्तीफे की माग करते हुए इस मामले पर चुप्पी साधने के लिए काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी की आलोचना की.

पार्टी के मुखपत्र सामना में लिए लिखे संपादकीय में ठाकरे ने कहा कि काग्रेस के युवराज [राहुल गाधी] मायावती के भ्रष्टाचार पर खूब बोलते है, परंतु वह अपनी खुद की सरकार के भ्रष्टाचार पर कुछ नहीं कहते. उन्होंने कहा कि उनकी मां [सोनिया गाधी] भी इस मुद्दे पर चुप हैं. प्रधानमंत्री भी अपना मुंह नहीं खोल रहे हैं. यह चुप्पी सच्चाई बया कर रही है. शिवसेना सुप्रीमो ने कहा कि अगर काग्रेस सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सही मायनों में स्वागत करती है, तो चिदंबरम और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने कहा कि काग्रेस दुनिया के सबसे बड़े घोटाले की जिम्मेदारी एक मंत्री [ए. राजा] पर डालकर नहीं बच सकती. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के एक चर्चित नोट का हवाला देते हुए ठाकरे ने कहा कि अगर उस वक्त वित्त मंत्रालय चाहता तो इस घोटाले को रोका जा सकता था.

 

लाइसेंस रद्द होने के फैसले पर पुनर्विचार हो

हैदराबाद. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी टेलीकॉम कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद  इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका का समर्थन किया है.

बकौल दिग्विजय, टेलीकॉम घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए जाने संबंधी फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए. कांग्रेस महासचिव ने कहा है कि लाइसेंसों के आवंटन में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो सीबीआई इसकी जांच कर रही है. दिग्विजय ने सवालिया लहजे में पूछा कि जो कंपनिया लाइसेंस पाने के बाद अपना आधार मजबूत कर चुकी हैं और जिनके साथ उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या जुड़ चुकी है, उनका क्या होगा? कांग्रेस महासचिव के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा जो इस प्रक्रिया के तहत अपना ढांचा खड़ा कर चुकी हैं. इसीलिए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दी जानी चाहिए और चुनौती दी जाएगी. संभवत: इस मामले में एक पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी.

भारत से कारोबार समेट सकती है यूनीनॉर!

ओस्लो. नार्वे की दूरसंचार कंपनी टेलीनॉर भारत में 2जी लाइसेंस रद्द किए जाने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को देखते हुए अपना करोबार समेटने के विकल्प पर विचार कर रही है.

टेलीनॉर भारत में रिएलटी कंपनी यूनीटेक के साथ मिलकर यूनीनॉर के नाम से टेलीकॉम कंपनी चला रही है. उच्चतम न्यायालय ने यूनीनॉर समेत 9 टेलीकॉम कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने का फैसला सुनाया है. हालांकि न्यायालय ने साथ ही यह भी कहा कि लाइसेंस रद्द होने से प्रभावित कंपनियां चार महीने के अदंर 2जी स्पेक्ट्रम जारी करने की नई व्यवस्था शुरू होने तक अपना कारोबार जारी रख सकती हैं. टेलीनॉर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फ्रेडरिक बाकसास ने  प्रतिक्रिया में कहा कि कई विकल्पों में से भारत से अपना कारोबार समेटना भी एक विकल्प है जिसपर हम विचार कर रहे हैं. न्यायालय का फैसला भारत में हमारे कारोबार पर गहरा आघात है. हमने भारतीय नियमों और कानून का पूरी तरह पालन किया और कई बड़ी टेलीकॉम कंपनियों को कड़ी प्रतिस्पर्द्धा भी दी लेकिन जो कुछ अब हो रहा है ऐसा हमने दुनिया के किसी देश में कहीं नहीं देखा.

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