बरसात के कारण खेतों में भरा पानी

बैरागढ़, 12 सितंबर,सं. संत हिरदाराम नगर के आसपास के गाँवों के किसान चिंता में डूबे हुए हैं इसका मुख्य कारण बरसात का पानी खेतों में भरा होने से सोयाबीन की फसल इस बार ठीक ढंग से आने के आसार नहीं दिख रहे हैं. जिसका कारण खेतों में नमी होना बताया जा रहा है.

हालांकि 2006 के बाद किसानों को इतनी बारिश का सामना पहली बार देखने को मिला. हालांकि बारिश के चलते खेतों में नमी बनी हुई है इसके कारण सोयाबीन की फसल बर्बाद होने के आसार नजर आ रहे है. अगर इसी तरह बर्बाद होती रही तो वो दिन दूर नहीं कि उनकी फसल चौपट हो जाएगी. उनका यह भी कहना है कि फसल दीपावली के आसपास पककर तैयार हो जाती है लेकिन राजधानी में हो रही लगातार रुक-रुक कर बरसात ने किसानों की नींद उड़ा दी है.

कई किसानों की सोयाबीन की फसल खेतों में जो लगी हुई है वह पीली पड़ गई है. इसका मुख्य कारण खेतों में बरसात का पानी बताया जा रहा है. क ई किसानों ने तो निजी ट्रेक्टरों एवं पम्प सेटों से पानी निकालना भी शुरू कर दिया है. किसानों का कहना है कि अब सोयाबीन की फसल को पानी की आवश्यकता नहीं है. अगर 15 दिन तक पानी नहीं गिरता है तो फसले बच जाएगी और वह पककर भी तैयार हो जाएगी लेकिन अभी सितंबर माह आधा बीतने को है. सोयाबीन की फसल तो इस बार अच्छी आने की उम्मीद किसानों ने जताई है लेकिन अगर 15-20 दिन तक पानी नहीं आता तो खरीफ की फसल अच्छे से आ सकती है. किसानों का कहना है कि सोयाबीन की फसल में फलियां तो लग गई है लेकिन वह दानों से भरा नहीं पा रही है क्योंकि खेतों में नमी इसका मुख्य कारण है.

बैरागढ़ के आसपास सैकड़ों गाँव इसके चपेट में है जहाँ खेतों में इन दिनों पानी भरा हुआ है और फसलें पूरी तरह पीली पड़ गई है. हालांकि इस बार कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव के कारण इल्ली व अन्य रोगों से सोयाबीन की फसल बच गई है. बैरागढ़ से लगे गाँवों में प्रमुख सोनूखेड़ी, भौंरी, बरखेड़ा, कजलास, मुंगालिया छापा, ईटखेड़ी, तूमड़ा, पाटनिया, खेजड़ादेव, चंदूखेड़ी, मुबारकपुर, मनीखेड़ी कीट, तारा सेवनिया, बागेनिया, झापडिय़ा, कलाखेड़ी, निपानिया जाट, प्रमुख है जहाँ सोयाबीन की फसल को लेकर कृषक इन दिनों चिंता में डूबे हुए हैं.

किसानों का कहना है:
सोयाबीन की फसल इस वर्ष पहले वर्षो से काफी अच्छी है लेकिन अधिक बरसात के चलते सोयाबीन का उत्पादन इस बार अच्छा आना मुश्किल दिख रहा है, इसका कारण खेतों में नमी होना है. इसी तरह बरसात होती रही तो सोयाबीन की फसल पककर आना मुश्किल दिख रहा है.

चांद सिंह मेवाड़ा, कृषक, खजूरी सड़क
अधिक बरसात के कारण इस वर्ष खेतों में पानी भरा हुआ है जहाँ सोयाबीन की फसल पूरी तरह पीली पड़ गई है. अब सोयाबीन की फसल को पानी की आवश्यकता नहीं है उन्होंने कहा कि 30 एकड़ भूमि में सोयाबीन की बुआई की है लेकिन खेतों में पानी भरा होने से फसल पूरी तरह पीली पड़ गई है.
जगदीश मीना, कृषक, खेजड़ादेव

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