भोपाल, 4 जुलाई. अनेक सरकारी, गैर सरकारी और विदेशी शिक्षा संस्थानों के बाद भी गुणवत्ता पूर्ण स्तरीय और देश में सक्षम और योग्य मानव, संसाधन विकसित करने वाली शिक्षा नदारत है. हमारी शिक्षा व्यवस्थाएं विकृति की शिकार है. शिक्षा को व्यवसाय का रूप देकर एक बड़ी भूल हुई है.

यदि हमें मध्यप्रदेश को विकास की नई मंजिलों पर ले जाना है तो सम्पूर्ण शिक्षा प्रणाली को नये सिरे से देखना होगा. तेजी से बदलती दुनिया में हमारे युवा अपनी जगह बना सकें वे रोजगार और काम पा सकें इसके लिये जरूरी है इस अपनी शिक्षा प्रणाली बदलें. सूने उजड़े क्लास रुम्स में न तो चमक बची है न कोई आकर्षण और न ही कोई रौनक शिक्षा संस्थान ज्यादातर निर्रथक उपाधियां बांटने में लगे है. आज युवाओं को डिग्रियों से अधिक काम के अनुभव, फील्ड वर्क और ऊँचे हुनर की जरूरत है, किताबी ज्ञान कम. शासन भी लगातार स्किल डेवलपमेंट पर जोर दे रहा है.

मध्यप्रदेश शासन विकास की नई राहें ढूंढ रहा है. मुख्यमंत्री की विदेश यात्राओं में नये पूँजी निवेश के जरिये नये उद्योगों और विकास की नई राहें बनेंगी. इसके लिये हमें भरपूर तैयारी करनी होगी. शासन के सहयोग के साथ समाज का सार्थक सहयोग जरूरी है. उद्योगों की स्थापना के पूर्व पर्यावरण पर पडऩे वाले संभावित प्रभाव (ई.आई.ए.) का आंकलन भी जरूरी है. स्वास्थ्य कृषि, जन जीवन पर पडऩे वाले असर भी हमें मालूम होने चाहिये. दूरसंचार सुविधाएं भूमि आवंटन, परिवहन, बिजली, पानी, कच्चे माल के साथ हमें अच्छा बाजार और मार्केटिंग नेटवर्क चाहिये, लाजिस्टिक सुविधाएं भी जरूरी हैं. इस समूची प्रक्रिया को यदि पूरा कर भी लिया लेकिन यदि हमें स्किल्ड वर्क फोर्स नहीं मिली तब क्या होगा. जरूरी है हमारे शिक्षा संस्थान उद्योगों के लिये दक्ष, काबिल और समर्पित वर्क फोर्स तैयार करें. इससे प्रदेश के युवाओं को ही काम मिल सकेगा.

शासन की प्राथमिकताएं तय करते हुये संभावित लगने वाले उद्योगों के लिहाज से साथ ही साथ दक्ष वर्क फोर्स तैयार करनी होगी. आई.टी. पर्यटन सत्कार, खाद्य प्रसंस्करण, टेलीकाम और पावर सेक्टर कुछ प्राथमिकता के क्षेत्र हो सकते है. इग्रू ने इस सभी क्षेत्रों में व्यवहारिक ज्ञान आधारित विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्रोग्राम विकसित किये है, जिनका लाभ शासन और समाज ले सकता है. हमें भारी भरकम डिग्रीधारियों से अधिक छोटे-छोटे हुनर क्षेत्रों में काम करने वाले चाहिये. हम प्रति वर्ष 50,000 इंजीनियरिंग डिग्रीधारी तैयार कर रहे है जिनका स्तर दयनीय है और 5,000 छोटे कामगार तैयार होते है. होना इसके ठीक उल्टा चाहिये. हम 50,000 कामगार प्रशिक्षित करें और 5,000 योग्य इंजीनियर.

इग्रू समूचे देश के साथ मध्यप्रदेश में भी स्तरीय सम्पूर्ण विश्व में मान्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये समर्पित है. समाज का प्रत्येक युवा और कोई भी किसी भी उम्र, व्यवसाय, क्षेत्र धर्म, नस्ल, लिंग का व्यक्ति मनचाही शिक्षा प्राप्त कर रोजगार प्राप्त कर सकता है. शिक्षा से वंचित प्रदेश की दूरदराज अंचलों में बसने वाली आबादी, वनवासी, पिछड़े वर्ग, महिलाएं, विकलांग और कामकाजी लोगों के लिये बेशुमार अवसर है. इग्रु ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में शिक्षा को रोजगार से जोड़ा है. इग्रू की डिग्री भार और भारत के बाहर प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार देने के साथ सशक्त और सक्षम बनाती है.

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