नई दिल्ली, 19 दिसंबर. फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट विदेशी जासूसों के नए जाल के रूप में उभरी है। सरकार ने पैरामिलिटरी और आर्म्ड फोर्सों के सीनियर ऑफिसरों को अपने करियर के बारे में इस पर कोई भी डिटेल शेयर करने से मना कर दिया है। अधिकारियों से कहा गया है कि बेहतर होगा, वे इन साइटों से दूर ही रहें।

साइबर जासूसी- आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, साइबर जासूसी का मामला सामने आया है, जहां संवेदनशील इलाकों में तैनात अर्द्धसैनिक बलों के अधिकारी सीमापार के जासूस या विदेशी एजेंटों के साथ चैट करते पाए गए। इंटरनेट पर ये जासूस या एजेंट खुद को खूबसूरत लड़कियों के रूप में पेश करते हैं। अधिकारियों पर होगी नजर यह खुलासा होने के बाद सरकार ने कई बैठकें कीं ताकि दुश्मन के जासूस सोशल नेटवर्किंग साइटों के जरिए अधिकारियों को अपने जाल में फंसाने के लिए सरकारी कंप्यूटरों का इस्तेमाल न कर सकें। अधिकारियों को भी इन तरकीबों के बारे में बताया गया। हालांकि कोई भी आधिकारिक रूप से कुछ कहने को तैयार नहीं है कि कितने अर्द्धसैनिक इस तरह के साइबर जासूसी मामलों में शामिल हैं, लेकिन इस घटनाक्रम को करीब से जानने वाले दूरसंचार मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में तैनात अधिकारियों पर नजर रखने के लिए एक प्रभावी सिस्टम बनाया जा रहा है। ब्लैकमेलिंग-सूत्रों के मुताबिक कुछ मामलों में तो अधिकारी आपत्तिजनक गतिविधि के साथ वीडियो चैट करते थे, जिसे दूसरे देशों में जासूसों ने रिकॉर्ड किया और बाद में रणनीतिक और वाणियिक सूचनाएं जुटाने के लिए ब्लैकमैल किया। अधिकारियों को तुरंत इन इलाकों से हटा दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।

लड़कियों पर इंप्रेशन-सूत्र बताते हैं कि कुछ अधिकारी एके-47 के साथ और वर्दी में पोज देते पाए गए। कुछ ने तो सर्विस रिवॉल्वर के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। पूछताछ के दौरान उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि उनका मकसद लोगों, खासकर लड़कियों को प्रभावित करना था। ऐसी घटनाएं अर्द्धसैन्य बलों में यादा हैं। सशस्त्र बलों में भी ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं। गृह मंत्रालय ने पहले ही अधिकारियों से अपने सरकारी कंप्यूटरों पर फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों से दूर रहने को कहा है। मंत्रालय ने इस बारे में अगस्त में ही सर्कुलर जारी कर दिया था।

Related Posts: