नई दिल्ली, 14 अगस्त. भारतीय कुश्ती के दो महानायकों ओलंपिक के रजत विजेता सुशील कुमार और कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त का और उनके गुरु द्रोणाचार्य अवार्डी महाबली सतपाल का सुबह लंदन से स्वदेश लौटने पर यहां इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर महास्वागत किया गया.

महाबली सतपाल के इन दोनों होनहार शिष्यों के साथ उनके छत्रसाल अखाडे के तीसरे पहलवान अमित कुमार ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान से स्वदेश पहुंचे थे. इन पहलवानों के साथ भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह. महासचिव राजसिंह. प्रमुख कोच विनोद कुमार और कोच यशवीर सिंह रात पौने बारह बजे जैसे ही टर्मिनल-थ्री से बाहर निकले पूरा आसमान सुशील और योगश्वर की जय-जयकार से गूंज उठा.  सतपाल, सुशील की पत्नी सवि, उनके परिवार के अन्य सदस्य और कोच रामफल इंडियन एयरलाइंस की उड़ान से पौने ग्यारह बजे स्वदेश पहुंचे. हजारों प्रशंसक ढोल-नगाड़ों के साथ देश को दो पदक दिलाने वाले पहलवानों के गुरु का स्वागत करने के लिए मौजूद थे.

सतपाल के छत्रसाल अखाड़े के कोचों वीरेन्द्र, मनोज राणा और वसंत राणा तथा सैकड़ों पहलवानों के साथ दिल्ली सरकार के भी अधिकारी और कर्मचारी हवाई अड्डे पर स्वागत के लिए मौजूद थे. इसी उड़ान से भारतीय ओलंपिक संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा, कांस्य पदक विजेता महिला मुक्केबाज एम सी मैरीकोम तथा कुछ पुरुष मुक्केबाज और दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशक अमित सिंघला भी स्वदेश लौटे. ओलंपिक में आखिरी स्थान पर रही हॉकी टीम कोच माइकल नोब्स के साथ इसी उड़ान से स्वदेश लौटी.

लेकिन टर्मिनल-थ्री के सामने भारी भीड़ को देखते हुए हाकी टीम को एक अन्य गेट से हवाई अड्डे से बाहर निकाला गया. इससे पहले लंदन ओलंपिक में इतिहास रचने वाले सुशील और योगेश्वर के स्वागत के लिए हजारों की संख्या में लोग ढोल-नगाड़ों, फूल मालाओं और मिठाइयों के साथ हवाई अड्डे पर मौजूद थे. भारी संख्या में मीडिया कर्मी सुशील के आगमन को अपने कैमरों में कैद करने के लिए हवाई अड्डे पर उपस्थित थे.

चारों तरफ लहरा रहे तिरंगों और जय-जयकार की गूंज के बीच सुशील और योगेश्वर अपने प्रशंसकों के कंधों पर बैठकर जैसे ही हवाई अड्डे से बाहर निकले पूरा माहौल आसमानी शोर से गूंज उठा. दोनों पहलवानों को फूल मालाओं से लाद दिया गया और इन दोनों विजेताओं ने अपने पदक दिखाने के बाद हाथ जोड़कर समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया जिसके कुछ देर बाद वे अलग-अलग वाहनों पर बैठकर अपने घरों की तरफ निकल पड़े.

सुशील की मां कमला देवी, उनके परिवार के सभी सदस्य, सुशील और योगेश्वर के गांवों के लोग, हरियाणा खेल विभाग के प्रतिनिधि भारतीय खेल प्राधिकरण साई के कुछ अधिकारी, गुरु हनुमान अखाड़े के संचालक महासिंह राव और गुरु हनुमान सेवा संस्था के मीडिया प्रभारी नंदकिशोर सोनी दोनों चैंपियनों का स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद थे. अंतरराष्ट्रीय हवाई अड््डे पर दस बजे से ही प्रशंसकों का जमावडा लगना शुरू हो गया था और 11 बजते-बजते टर्मिनल-थ्री के बाहर हजारों लोग जमा हो चुके थे. यह दृश्य उस वक्त की याद दिला रहा था जब सुशील बीजिंग ओलंपिक से कांस्य पदक और मास्को से विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतकर स्वदेश लौटे थे.

सुशील के स्वागत में बकायदा एक ट्रक सजाकर खड़ा था जिस पर लिखा था. भारत की शान सुशील पहलवान, सुशील के इस महास्वागत से अभिभूत नजर आ रहीं उनकी मां कमला देवी ने कहा हमारे लिए यह उत्सव का समय है कि हमारा बेटा देश का नाम रौशन कर स्वदेश लौटा है. सुशील की मां ने कहा यह स्वागत देखकर बड़ा अच्छा लग रहा है. सुशील की कुश्ती के बाद मेरी उससे रात डेढ़ बजे बात हुई थी. तब उसने पूछा था मम्मी- मैंने अच्छा किया. मैंने कहा कि बेटा तुमने देश का नाम रोशन किया. सुशील की बहन सीता ने कहा कि उसका रजत पदक किसी स्वर्ण से कम नहीं है. सुशील के गांव बापरौला की कई महिलाएं हवाई अड्डे पर मौजूद थीं. कमला देवी ने कहा कि वह अपने बेटे को अब जमकर काजू की बर्फी, आलू के परांठे और दूध, मक्खन खिलाएंगी.

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