नई दिल्ली, 11 सितंबर. केंद्र सरकार सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक के तहत सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि जातीय और क्षेत्रीय हिंसा को भी उसके दायरे में लेने को तैयार है। राष्ट्रीय एकता परिषद के सामने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का मसौदा रखते हुए चिदंबरम ने कहा कि देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती विरोध के लिए हिंसा के इस्तेमाल की प्रवृत्ति है।

राष्ट्रीय एकता परिषद [एनआइसी] की बैठक को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सांप्रदायिकता, जातिवाद और संकीर्णता अब भी कायम हैं। साथ ही नई चुनौतियां भी पैदा हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती विरोध या बदलाव के लिए हिंसा का प्रयोग है। उग्रवाद और आतंकवाद भारत की अवधारणा के लिए गंभीर चुनौती हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवादी गुटों के हमलों पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है। लेकिन वाम विचारधारा वाले समूहों और पूर्वोत्तर के राज्यों में अलगाववादी समूहों द्वारा की जा रही हिंसा पर भी ध्यान देना आवश्यक है। बैठक का एजेंडा स्पष्ट करते हुए चिदंबरम ने कहा कि चारों विषयों में एक चीज समान है और वो है हिंसा, जिससे हमारे राष्ट्रीय जीवन की आधारशिला के नष्ट होने का खतरा है। जिस एक मुद्दे पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई वो था सांप्रदायिक हिंसा का विषय।

बैठक में चर्चा के लिए जो विषय रखे गए उनमें धर्म के नाम पर युवकों में कंट्टरता और जातिवाद के कारण उनके द्वारा हिंसा का इस्तेमाल भी शामिल थे। चिदंबरम ने परिषद से एजेंडे में शामिल मुद्दों के समाधान पर सरकार को सुझाव देने का आग्रह किया। साथ ही गृहमंत्री ने परिषद से गंभीर चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सरकार और सिविल सोसाइटी की संस्थाओं की क्षमताओं में सुधार के उपाय भी पूछे।

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