हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल

नई दिल्ली, 16 मई. दिल्ली हाई कोर्ट ने सचिन तेंडुलकर को राज्यसभा सदस्य मनोनीत किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से 4 जुलाई तक जवाब मांगा है. कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि दायर की गई याचिका पर सरकार का क्या रुख है? हालांकि, कोर्ट ने सचिन के शपथ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

जस्टिस ए.के. सीकरी और जस्टिस राजीव सहाय की बेंच ने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ए.एस. चंडोक से सरकार की राय पूछी है. उन्होंने पूछा है कि राज्यसभा के लिए स्पोर्ट्स कैटिगरी से किसी खिलाड़ी को कैसे नॉमिनेट किया गया? इस याचिका में कहा गया है कि राज्यसभा के लिए सचिन का मनोनयन संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है. याचिका दायर करने वाले दिल्ली के पूर्व एमएलए रामगोपाल सिंह सिसोदिया की दलील है कि संविधान में स्पोर्ट्स कैटिगरी से किसी व्यक्ति को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने का उल्लेख नहीं है. सिसोदिया ने अपनी याचिका में कहा है कि संविधान की धारा 80 (3) के मुताबिक राज्यसभा के लिए साहित्य, विज्ञान, कला और समाजिक सेवाओं के क्षेत्र की हस्तियों को मनोनीत किया. जा सकता है लेकिन इसमें खेल जगत की हस्तियों को नामांकित किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इसी याचिका को खारिज करते हुए रामगोपाल सिंह सिसोदिया को हाई कोर्ट जाने के लिए कहा था.

आईपीएल में नहीं खेलें सचिन : शिवराज

भोपाल, 16 मई. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को खेल तमाशा करार देते हुए मुम्बई इंडियंस टीम के सदस्य महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को इस ट्वेंटी-20 लीग से दूर रहने की सलाह दी है.

चौहान ने बुधवार को संवाददाताओं से चर्चा करते हुए सचिन को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर बधाई देते हुए कहा है कि वह महान खिलाड़ी हैं और उन्हें आईपीएल में नहीं खेलना चाहिए. मुख्यमंत्री के मुताबिक आईपीएल पैसे वालों का तमाशा बन गया है और यह गंदा खेल हो गया है. इस आयोजन में काला धन लगाया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि सचिन जैसे महान खिलाड़ी इस आयोजन में खेलते हैं जो ठीक नहीं है. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आईपीएल के आयोजन की सम्पूर्णता पर भी विचार किया जाना चाहिए.

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