माखनलाल विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में  निश्चलानंद

भोपाल,1 दिसंबर नभासं. देश की पत्रकारिता दिशाहीन होती जा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह दिशाहीन व्यापार तंत्र और दिशाहीन शासन तंत्र से पत्रकारिता का गठबंधन है. आज के समय में पत्रकारों के सामने दिशाहीन पत्रकारिता से निपटना सबसे बड़ी चुनौती है.

यह उद्गार गुरूवार को जगन्नाथपुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संगोष्टी में व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि दिशाहीन व्यापार तंत्र और निरंकुश शासन तंत्र ने पत्रकारिता में ऐसी जड़े जमा ली हैं कि उसके बिना कोई अखबार का मालिक एक प्रांन्त में अखबार नहीं प्रकाशित कर सकता. उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि जिस देश में नारद मुनि और वेद व्यास जैसे पत्रकार व दिव्य दृष्टि के पुरोधा रहें हो उस देश की पत्रकारिता की यह हालत चिंता जनक है. स्वामी निश्चलानंद ने छात्रों को ज्ञान अर्जन की समस्त विधियों के बारे में विस्तार से चर्चा की. छात्रों को समझाइस देते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकार को यदि समाज और अपना भविष्य उज्जवल बनाना है तो लोभ, भय, भावुकता और अविवेकता का पूर्ण तिरस्कार करना होगा. तभी आप और समाज उज्जवल भविष्य के पथ पर बढ़ सकते हैं. इसके अलावा खबरों को सत्यं शिवम सुन्दर के अनुरूप गढऩे की कोशिश करें. उज्जवल पत्रकारिता का ज्ञान सभी को देवर्षि नारद से लेना चाहिए.

अमरीका की पत्रकारिता दिशाहीन:
फटाफट खबरों का आज जो प्रसारण हो रहा है वह अमेरिका मीडिया की ही देने है. खबरों कैसी है, उसका प्रभाव सभी काल में क्या पड़ेगा वहां नहीं देखा जा रहा है. यही कारण है कि अमरीकी राष्ट्र अध्यक्ष पर जूता फेंकने की घटना तीन दिनों तक विश्व भर के मीडिया में प्रकाशित होती रही. जिसका प्रसारण विश्व भर के लोगों ने देखा. जिसका परिणाम यह हुआ कि उसी तरह की घटना अब हर एक देश में घटित होने लगी. इस लिए पत्रकारों को खबर प्रकाशित करने के पहले वर्तमान, भविष्य का चिंतन कर लेना चाहिए.

गुप्तचर विभाग तक पहुंच घातक
आज के दौर में मीडिया की पहुंच लोगों की निजी जिदंगी से घटनाओं से लेकर गुप्तचर एंजेसियों तक हो गई है. जिसके परिणाम बहुत ही घातक हो सकते हैं. इसलिए मीडिया कर्मियों को गुप्तचर विभाग, न्यायपालिका और किसी के निजी जिंदगी के प्रसारण के पहले उसका चिंतन कर लेना चाहिए.

आवारा बनाने की कूटनीति
पाश्चात्य संस्कृति ने हमारे देश के पशु पक्षियों तक को नहीं छोड़ा है. यह दुर्भाग्य है कि जिस देश में गाय को माता की संज्ञा दी जाती रही है. आज वही गाय को पाश्चात्य कूटनीतिज्ञों ने हमारी मां समान गाय को अवारा बता रहे हैं. किसी जर्सी गाय को अवारा नहीं कहा जाता है. हालत यही रही तो वह दिन दूर नहीं जब हम भारतियों को भी आवारा कहा जाने लगेगा. अंग्रेजों ने तीन सी के माध्यम से देश का बंटाधार करने में जुटा है. पहला सी क्लास जिसके नाम पर छात्र लाखों रूपए लेकर संस्थान में दाखिला पा रहे हैं. स्वामीजी ने कहा कियह सोचने की बात है कि क्या 10 लाख रूपए लगाकर दाखिला पाने वाला छात्र समाज सेवा करेगा. वहीं किसी दल का टिकट लेने के लिए 20 लाख रूपए देकर जो प्रतिनिधि जीत कर आएगा क्या वह जनसेवा कर पाएगा. दूसरा सी क्लब जो हमारी संस्कृत में फूहड़ता और अश्लीलता का मिक्स कर दिया है.

स्वागत में फूलों की वर्षा
पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का जैसे ही विवि परिसर में प्रवेश हुए वैसे ही उनके स्वागत में तैयार छात्रों ने फूलों की वर्षा की. विवि से प्रथम तल से लेकर पांचवे तल तक विद्यार्थियों ने उनके चरणों में फूल वर्षा कर आर्शिवाद लिया. इस अवसर पर रमेश शर्मा, कुलपति बीके कुठियाला समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

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