प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अमृत महोत्सव का शुभारम्भ

भोपाल,23 दिसंबर. राज्यपाल राम नरेश यादव ने आज यहां प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित अमृत महोत्सव का शुभारम्भ करते हुए कहा कि चरित्र और नैतिकता भारतीय प्राचीन संस्कृति का आदर्श रही है.

सौहाद्रपूर्ण सह अस्तित्व तभी संभव है जब हमारा जीवन मानवीय व नैतिक मूल्यों से संपन्न होगा. चरित्र को सबसे बड़ा धन कहा गया है और चरित्र की पवित्रता ही सबसे बड़ी साधना है. उन्होंने कहा कि सकारात्मक परिवर्तन के लिए आवश्यक प्रेरणा का अभाव है, लेकिन स्वपरिवर्तन से संसार परिवर्तन के आदर्श सिद्धांत पर अग्रसर होकर ही लक्ष्य को हासिल करने में सफलता पाई जा सकती है. यादव ने कहा कि आध्यात्मिक जागृति का संचार करके भारत को पुन: विश्व के आध्यात्मिक गुरू के रूप में प्रतिष्ठित किया जा सकता है. देश ने श्वेत क्रांति, हरित क्रांति देखी, अब आध्यात्मिक क्रांति के शंखनाद का समय आ गया है. जब तक हम पूरे विश्व को अपना परिवार स्वीकार नहीं करते तब तक विश्व में अमन एवं खुशहाली नहीं लायी जा सकती है. यादव ने कहा कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू ने पूरी दुनिया को विश्व बंधुत्व का पाठ पढ़ाया है. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा के सिद्धांतों और चरित्रमूल्यों को आत्मसात कर ही महात्मा का दर्जा प्राप्त किया.

अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउण्ट आबू से आईं राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी प्रभा मिश्रा ने कहा कि मानव मात्र के चरित्रिक पतन का कारण आध्यात्मिकता का आभाव है. उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक क्रांति से विश्व में शांति व खुशहाली आ सकती है. ब्रह्माकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय निदेशिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अवधेश ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि यह आयोजन स्वर्णिम विश्व के आव्हान व स्वागत की एक कड़ी है. ब्रह्माकुमारी अवधेश ने राज्यपाल को पगड़ी, शाल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया. राज्यपाल ने दीप प्रज्जवलित कर अमृत महोत्सव का शुभारम्भ किया. ब्रह्माकुमारी रीना बहन ने कामेंट्री द्वारा मेडीटेशन कराया. आभार प्रदर्शन रेनु बहन ने किया.

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