लखनऊ,. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचार का जोर तेज हो रहा है तो राज्य के लोकायुक्त के पास बहुजन समाज पार्टी के विधायकों और प्रत्याशियों के खिलाफ शिकायत का अंबार भी लग रहा है.

लोकायुक्त कार्यालय में पिछले तीन दिन में बीएसपी के विधायकों और प्रत्याशियों के खिलाफ शिकायत के एक दर्जन से भी ज्यादा मामले आए हैं. शिकायतें सरकारी जमीन पर कब्जे, आय से अधिक संपत्ति और विधायक निधि के दुरूपयोग के बारे में है. लोकायुक्त कार्यालय की मुसीबत है कि इन शिकायतों की जांच जल्द कैसे करें. जल्द जांच से यह संदेश भी नहीं जाय कि चुनाव को ध्यान में रखकर यह सब किया जा रहा है.

लोकायुक्त के पास क्चस्क्क विधायकों की शिकायत का अंबार
जांच से कोई राजनीतिक दल फायदा नहीं उठाये इस बारे में भी लोकायुक्त कार्यालय सोच रहा है. लोकायुक्त कार्यालय के अनुसार पिछले तीन दिन में बीएसपी विधायक और जलालाबाद सीट से प्रत्याशी नीरज कुशवाहा, मटियारी से प्रत्याशी चन्द्रप्रकाश, सरधाना से पार्टी उम्मीदवार चन्द्रवीर सिंह, घाटमपुर सीट से प्रत्याशी रामप्रकाश कुशवाहा, देवरिया से प्रत्याशी दीनानाथ कुशवाहा, पीलीभीत से रियाज अहमद, गाजीपुर से उमाशंकर कुशवाहा, चकिया से जीतेन्द्र कुमार, रूद्रपुर से सुरेश तिवारी, जहुराबाद से कालीचरण और बदायूं से रामसेवक सिंह पटेल के बारे में शिकायतें मिली हैं. लोकायुत कार्यालय के अनुसार बीएसपी विधायकों पर ग्राम सभा की जमीन पर कब्जे की ज्यादा शिकायते हैं. इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी जरूरी दस्तावेज के साथ सबूत दिए गए हैं. लोकायुक्त कार्यालय यह भी मानता है कि शिकायत का एक कारण राजनीतिक प्रतिद्वंदिता हो सकती है. अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति लोकायुक्त एन.के.मेहरोत्रा ने अपने कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी शिकायत को कार्यालय के बने फार्म पर जरूरी और सबूत के साथ मिले दस्तावेज के बाद ही दर्ज किया जाय. ऐसी शिकायतों का संज्ञान नहीं लिया जाय जो सादे कागज पर लिखकर की गई है. दस्तावेज के साथ जरूरी हलफनामा भी होना चाहिए.

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