बैंकों में हड़ताल के चलते लटके ताले, लोग हुए परेशान

भोपाल, 23 अगस्त,नभासं. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से आज पहले दिन ही बैंकों पर ताले लटके रहे.

इस बीच बैंकों में कामकाज नहीं होने से लोगों को खासा परेशान होना पड़ा, वहीं बैंक कर्मचारियों ने एमपी नगर स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के सामने प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी. इस दौरान बड़ी संख्या में बैंककर्मी हाथों में मांगों से लिखी तख्तियां लिए नारेबाजी कर रहे थे.बैंक हड़ताल में करीब 10 लाख से अधिक कर्मचारी शामिल हैं. इससे बैंकों में कामकाज ठप होने के कारण करोड़ों रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है. यह हड़ताल दूसरे दिन गुरुवार को भी जारी रहने से यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के बैनर तले हो रही बैंक कर्मियों की हड़ताल में यूनियनों ने कई मांगें रखी हैं. इसमें बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और काम को आउटसोर्स से कराने का विरोध शामिल है. उधर, बैंक हड़ताल को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स की सरकार से हुई बातचीत भी विफल रही. यूनाइटेड फोरम के बैनर तले हो रही बैंक कर्मियों की हड़ताल में चार अधिकारी यूनियनें और पांच कर्मचारी यूनियनें हैं. बताया जाता है कि यह सभी यूनियनें खंडेलवाल समिति की बैंकिंग सुधार संबंधी रिपोर्ट को लागू के विरोधी हैं. समिति ने सरकार को सुझाव दिया था कि वह बैंकों की नॉन कोर गतिविधियों को आउटसोर्स करे. इसके साथ ही भर्ती मानकों, जिसमें प्रक्रिया, परीक्षण आदि को बढ़ाएं. समिति ने बैंंकिंग क्षेत्र में सभी के लिए कंप्यूटर में कुशलता को अनिवार्य किया है. साथ ही क्लर्क की न्यूनतम योग्यता स्नातक के साथ इसके नीचे के स्टाफ के लिए 10वीं तक तय की है.

बैंक कर्मचारियों ने राजधानी में एमपी नगर स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में सभा की. इससे पहले बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रेस कॉम्पलेक्स से विशाल रैली निकाली. इसके बाद वापस प्रदर्शन स्थल पहुंचकर रैली आमसभा में त?दील हो गई, जहां यूनियन के नेताओं ने संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय बैंक संघ की बैंकिंग उद्योग में दिशा विहीन नीतियों के विरोध में नारे लगाए. यूनियन के को-ऑर्डिनेटर बीके शर्मा ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की लंबित मांगों के निराकरण के लिए यह हड़ताल हो रही है. उन्होंने कहा कि बैंक कर्मियों की मांग है कि लंबित मांगों का निराकरण किया जाए. इसमें मानव संसाधन मुद्दों पर एकतरफा निर्देश जारी न किये जाएं, खंडेलवाल कमेटी की अनुसंशाओं को एकतरफा लागू करना बंद किया जाए, बैंक कार्यों की आउट सोर्सिंग पर विराम लगे, बैंकिंग सेक्टर रिफार्म बंद हो तथा ग्रामीण शाखाओं को यथावत रखा जाए.

बैंक कर्मियों की हड़ताल से सबसे ज्यादा नुकसान व्यापारियों को हुआ है. प्रदेशभर में प्रतिदिन करीब 80 हजार चेक समाशोधन के लिए आते हैं, जबकि राजधानी भोपाल में करीब 20 हजार चेकों का समाशोधन किया जाता है. बुधवार और गुरुवार को बैंक कर्मियों की हड़ताल से इन चेकों के समाशोधन का कार्य ठप रहेगा. इससे खासकर व्यापारियों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा. वहीं शासकीय विभागों पर भी असर दिखेगा. बैंक कर्मियों की हड़ताल से देशभर की करीब 77 हजार और मप्र की करीब 5500 बैंक शाखाओं में कामकाज ठप रहा. बताया जाता है कि यूनियन और भारतीय बैंक संघ के बीच हड़ताल को लेकर बात नहीं बनी हे. कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि दोनों पक्षों द्वारा सहमति प्राप्त मुद्दे जैसे अनुकंपा नियुक्ति, एक्स-ग्रेशिया योजना, स्टाफ ऋणों में सुधार, व्हीआरएस-त्यागपत्र द्वारा सेवानिवृत बैंक कर्मियों को पेंशन का दूसरा विकल्प देने को लागू करने में भारतीय बैंक संघ द्वारा मजूबरी बताकर मामले को टाला जा रहा है.

प्रदेशभर में 3 लाख करोड़ का कारोबार प्रभावित

बैंक कर्मियों के दो दिनी बैंक हड़ताल में प्रदेश से करीब 40 हजार अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए. इससे प्रदेशभर में बैंकिंग सेवाएं ठप हो गईं हैं. बैंकों में कामकाज नहीं होने से बुधवार को अधिकांश बैंकों की शाखाओं में ताले लटके रहे. इस हड़ताल से राजधानी भोपाल में ही करीब 20 हजार करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ. उधर, पहले दो दिन की छुट्टी के बाद अब लगातार दो दिनों तक बैंक हड़ताल के चलते अधिकांश बैंकों के एटीएम बुधवार से ही खाली हो गए. इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

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