मध्यप्रदेश के अन्नदाता किसान एक बार फिर सुर्खियों में हैं. गांव-कस्बों में बारदाने से लगाकर तो कर्ज, मौसम की मार, अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से लगाकर तो जमीनों के नामांतरण, हस्तांतरण जैसे अनेक मुद्दों पर हमारे किसान परेशान रहते हैं. ताजा मामला उस समय चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया जब रायसेन के बरेली में पुलिस फायरिंग से एक किसान की मृत्यु हो गई. भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में ये अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे और इसी दरमियान किसानों-प्रशासन और पुलिस के बीच टकराहट की स्थिति पैदा हो गई. आगजनी और पथराव की घटनाओं के बाद स्थिति अनियंत्रित होती चली गई. पुलिस की गाडिय़ां जलाई गईं.

आमने-सामने के खुले संघर्ष के दरमियान दोनों पक्ष घायल हुए. पुलिस फायरिंग में पूर्व सरपंच और किसान हरीसिंह प्रजापति की मौत ने माहौल को ज्यादा गरमा दिया. आंदोलन के दौरान किसान की फायरिंग में मौत हो जाना व्यवस्था और समाज दोनों के लिए दुखद पहलू है. इसके एक दिन पूर्व भी इसी क्षेत्र में एक किसान की आत्महत्या ने भी स्थितियों के अति चिंताजनक होने के संकेत दे दिये थे. यहां यह बिंदु भी सोचने का विषय है कि मध्यप्रदेश में पिछले दो-तीन सालों से किसानों की पीड़ा केवल किसानों के लिए ही नहीं अपितु समग्र समाज के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है.

आत्महत्याओं के बढ़ते आंकड़ों ने यह चिंतन करने के लिये मजबूर किया है कि कहीं न कहीं कोई टीस ऐसी है, जिसका निराकरण भूगोल और राजनीति से ऊपर उठकर किया जाना जरूरी है. राज्य और केंद्र सरकार को इसमें समन्वय के साथ काम करना आवश्यक है. म.प्र. में सरकार का नारा है- खेती को लाभ का धंधा बनायेंगे. कृषि केबिनेट यहां पृथक से गठित है. इसके अलावा एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण सुविधा किसानों के लिये उपलब्ध है. इन सबके बावजूद यदि किसान गेहूं की बम्पर फसल लेता है और उसके भंडारण और सुरक्षा की यदि उचित व्यवस्था नहीं हो रही है तो व्यवस्था पर सवालिया निशान तो लगता है फिर इसके पीछे चाहे केंद्र हो या राज्य. यद्यपि म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक कहर के पहले ही किसानों की समस्या को लेकर दिल्ली में धरने की चेतावनी दी थी. कल सुषमा स्वराज ने भी लोकसभा में हाथ जोड़कर कहा है कि केंद्र बोरियां भिजवाये. लेकिन इन सबके साथ ही प्रदेश के किसानों को विश्वास और धैर्य की जरूरत है और राज्य सरकार को इस दिशा में और प्रभावी भूमिका निभाना चाहिए.

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