रिटेल व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर सरकार का रुख भी कड़ा हो गया है और वह विपक्ष से सीधी भिड़ंत के लिए भी तैयार दिख रही है.विपक्ष के यह अनुमान हैं कि यदि स्थगन प्रस्ताव पर बहस हो जाती है तो सरकार के सहयोगी दल मतदान में संभवत: सरकार के विरुद्ध मतदान कर सकते हैं.

उनके अनुमानों में करुणानिधि की डी.एम.के., ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस जो सरकार के समर्थन में है, स्थगन के पक्ष में और निवेश के विरुद्ध मतदान करेंगे. साथ ही सरकार के अन्य समर्थक मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी, लालू यादव की राजद और मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी विपक्ष की तरफ आ जायेगी.  लेकिन अब यह आभास हो रहा है कि सरकार ने अपने सहयोगी दलों से वार्ता करके एक बिल्कुल नए ढंग से विपक्ष द्वारा लाये जा रहे राजनैतिक संकट को खत्म करने का प्रयास कर लिया है.

सरकार के जो दल इस निवेश निर्णय के विरुद्ध हैं वे यह मान चुके हैं कि वे इस नीति विशेष के तो विरुद्ध हैं पर इसको सरकार का विरोध नहीं बनाया जायेगा. स्थगन प्रस्ताव की बहस से वे सरकार से इसे वापस लेने का आग्रह करेंगे लेकिन मतदान पर या तो वाकआउट करके भाग नहीं लेंगे या सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे. वे सरकार को गिरने नहीं देंगे. प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि इस निर्णय को वापस नहीं लिया जायेगा. इससे विश्व में सरकार पर लोगों का भरोसा उठ जायेगा. स्थगन प्रस्ताव के मसले पर भारतीय जनता पार्टी व विपक्षी दल भी अपनी बात पर अड़े हैं. ऐसे में यही संभावना बन रही है कि स्थगन प्रस्ताव पर बहस के लिए सरकार व विपक्ष में सहमति बन जायेगी. सरकार इस प्रश्न पर इस बात पर भी आ गई कि उसने विपक्ष को चुनौती दे दी कि वह सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव ले आए. सरकार अब इस भरोसे में दिख रही है कि उसके सहयोगी इस तमाम विरोध के बावजूद सरकार के विरुद्ध मतदान नहीं करेंगे. विपक्ष इस समय भ्रमजाल में है कि संभïïवत: वे सरकार के विरुद्ध मतदान कर दें.

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