इंडियन मुजाहिदीन और सिमी के आतंकवादी एक बड़ी पूर्व आयोजित साजिश के तहत देश में साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने की साजिश रच रहे हैं. मुम्बई के आजाद मैदान में रजा अकादमी के तत्वावधान में इकट्ठी बड़ी भीड़ ने एकाएक बड़े पैमाने पर हमले, आगजनी, तोडफ़ोड़ कर हिंसा फैला दी. जांच एजेंसियों को इसमें सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के हाथ होने का पता चला है.

इसका मास्टर माइंड साकिब नाचान बताया गया है, जो सिमी का संचालन कर रहा है. इस पर कनिष्क विमान में विस्फोट और सन् 2003 मुंबई के उपनगर मुलुंड में लोकल ट्रेन में ब्लास्ट करने का आरोप है. यह इस वक्त जमानत पर छूटा हुआ है. यह जानकारी पुलिस को उन 23 लोगों से पूछताछ से लगी जिन्हें आजाद मैदान में हिंसक वारदातों के कारण गिरफ्तार किया गया है. सिमी मध्यप्रदेश में भी बहुत सक्रिय है. खंडवा, बुरहानपुर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर व भोपाल में इसके अड्डे हैं. इन दिनों भोपाल में भी शहर काजी के नाम से फर्जी एस.एम.एस. प्रसारित किये जा रहे हैं जिसमें अल्पसंख्यकों को हिंसा के लिए भड़काया जा रहा है. मस्जिद कमेटी ने भोपाल पुलिस को इसकी सूचना दी है कि शहर काजी के नाम से कुछ तत्व साजिश कर रहे हैं.

इंडियन मुजाहिदीन व सिमी संगठनों ने बड़े ही सुनिश्चित ढंग से दक्षिण के कर्नाटक, आंध्र और पश्चिम के महाराष्ट में यह खबर फैला दी है कि रमजान के बाद असम में बंगलादेशियों पर हुए हमले के प्रतिशोध में इन राज्यों में रह रहे असम व पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों पर हमले किये जायेंगे. इसे अफवाह व धमकी दोनों कहा जा सकता है. इससे बंगलौर, हैदराबाद व पुणे में रह रहे असम राज्य के लोगों ने अपनी सुरक्षा के लिए भगदड़ के रूप में असम राज्य लौटना शुरू कर दिया. कर्नाटक के गृहमंत्री श्री आर. अशोक, केंद्रीय गृहमंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे, असम के मुख्यमंत्री श्री तरुण गोगई ने लोगों को आश्वस्त किया है कि ये सिर्फ अफवाहें हैं अभी तक इन राज्यों से किसी भी असमवासी पर हमला नहीं हुआ है. इसके बाद भी मुम्बई के आजाद मैदान की घटना को देखते हुए असमवासियों में भय है कि यह आतंकवादी इस्लामी साम्प्रदायिक संगठन बंगलादेशियों के संदर्भ में उन पर हमले कर सकते हैं.

निश्चित ही यह सरकार की विफलता है कि वह इन राज्यों में रह रहे असम के लोगों में यह विश्वïास नहीं जमा पा रही है कि ये इस्लामी आतंकवादी संगठन उन पर हमला नहीं कर पायेंगे. मुम्बई के आजाद मैदान पर रजा अकादमी की ओर से की गई आतंकी कार्यवाही बहुत गंभीर है. संसद में भी यह मामला गूंज रहा है. इसकी असली समस्या वह बंगलादेशी लोग हैं जो बहुत बड़ी संख्या में असम राज्य में आये हैं. इससे वहां असम के असमियां लोगों के सामने अपने ही राज्य में अल्पसंख्यक होने का खतरा पैदा हो गया. भारत सरकार भी इन बंगलादेशियों को भारत का नागरिक नहीं मानती है, लेकिन वह उन्हें वापस भी नहीं भेज रही है. इसी के कारण उत्तर-पूर्व के राज्यों में खासकर असम में लगभग पिछले 50 वर्षों से यह बंगलादेशी समस्या बने हुए हैं. ये लोग असम की मतदाता सूची में आ गये थे. इन्हें इनके नाम काटने के लिये असम में बड़ा तीव्र आंदोलन चला था. इन्हीं के विरोध में असम गण परिषद पार्टी और उसकी सरकार वहां सत्ता मे आई थी.

हाल ही जब केन्द्रीय सरकार ने ‘आधार कार्ड’ योजना बनाई तब उसका स्वरूप संवैधानिक मान्यता का नागरिकता कार्ड था. लेकिन इन्हीं बंगलादेशियों की समस्या के कारण उसे केवल परिचय पत्र कर दिया गया है. आशंका यह थी कि ये लोग जैसे असम राज्य की मतदाता सूचियों में घुस गये थे, उसी तरह यह आधार कार्ड में भी आ जायेंगे- जो उनकी नागरिकता का कार्ड हो जायेगा इसलिये इसका संवैधानिक रूप में नागरिकता कार्ड होना खत्म किया गया.
लेकिन भारतीय जनता पार्टी का यह तर्क बिल्कुल गलत है कि यूपीए की सरकार कुछ नहीं कर रही है. यह समस्या 50 साल से चल रही है. बीच में प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की एन.डी.ए. सरकार भी 5 साल चली. उन्होंने भी कुछ नहीं किया था. इस समस्या का एकमात्र समाधान यही है कि इन बंगलादेशियों को बंगलादेश वापस भेजा जाए.

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