लखनऊ. चार मंत्रियों को बर्खास्त करने के फौरन बाद ही यूपी की मुख्यमंत्री मायावती की तलवार एक बार फिर घूमी. इस बार बर्खास्त हुए विज्ञान प्रोधौगिकी राज्य मंत्री यशपाल सिंह और अतिरिक्त ऊर्जा राज्य मंत्री अकबर हुसैन. सरकार के मुताबिक दोनों ही मंत्रियों पर भ्रष्टाचार और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं. मायावती के ऑपरेशन क्लीन में अब तक बर्खास्त होने वाले मंत्रियों की तादाद करीब डेढ़ दर्जन तक जा पहुंची है.

दरअसल चुनाव से ठीक पहले अपनी सरकार की छवि सुधारने में जुटी यूपी की मुख्यमंत्री मायावती ने विज्ञान प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री यशपाल सिंह और अतिरिक्त ऊर्जा राज्य मंत्री अकबर हुसैन को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया. इन दोनों मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों के अलावा पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था. मायावती इससे पहले रघुनाथ प्रसाद, राजेश त्रिपाठी, आनंद सेन यादव, यमुना निषाद, के के गौतम को भी बर्खास्त कर चुकी हैं. अनंत कुमार मिश्रा और बाबू सिंह कुशवाहा को भी एनआरएचएम घोटाले में मंत्री पद से हटाया जा चुका है. अशोक दोहरे, अवध पाल सिंह, रंगनाथ मिश्रा, बादशाह सिंह और रतनलाल अहिरवार लोकायुक्त जांच के बाद हटाए गए. राकेश धर त्रिपाठी, हरिओम उपाध्याय, राजपाल त्यागी और अवधेश वर्मा को भी चुनाव आचार संहिता लगने के बाद हटाया गया.

इस बीच लोकायुक्त दफ्तर से भी मायावती सरकार को एक झटका लगा. भ्रष्टाचार के आरोप में लोकायुक्त ने लघु उद्योग राज्य मंत्री चंद्रदेव यादव को हटाने की भी सिफारिश कर दी है. आरोप है कि चंद्रदेव यादव मंत्री रहते हुए भी पिछले पांच सालों से अपने स्कूल से हेडमास्टर की तनख्वाह लेते रहे. मामला लोकायुक्त जांच में पहुंचा तब मंत्री जी ने पूरा वेतन वापस करने की बात कबूल कर ली. अब लोकायुक्त की सिफारिश के बाद चंद्रदेव यादव का हटना भी तय माना जा रहा है. मुलायम सरकार की कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के आरोपों को मुद्दा बनाकर सत्ता में आई मायावती के लिए अब खुद ये सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. इन मंत्रियों की बर्खास्तगी के अलावा मायावती अब तक करीब 100 मौजूदा विधायकों के टिकट भी काट चुकी हैं.

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