हमेशा से सरकारें ही अपराधियों को पकड़ती रहीं, उन्हें सजा देती है और माफ करके या सजा पूरी होने पर उनकी रिहाई भी करती है. लेकिन अब सरकार इतने नीचे स्तर पर आ गई है कि उसे सरकार कहना ही नहीं चाहिए. अब अपराधी सरकार को पकड़ते हैं, उसे आदेश देते हैं कि वह उनके लोगों को रिहा करे. सरकारें उन आदेशों का पालन करती हैं और उन्हें रिहा कर दिया जाता है.

अब तक तीन कलेक्टर पकड़े जा चुके हैं. पहला आंध्र में, दूसरा ओड़ीसा के मलकानगिरी में और तीसरा अभी छत्तीसगढ़ के सुकमा में पकड़ा गया. सरकार ने फिरौती में कुछ रिहाईयां देकर कलेक्टरों की रिहाई पाई है. सुकमा का कलेक्टर मेनन को छुड़ा लिया, लेकिन जब इसे पकड़ा गया था तब इनके दो सुरक्षा गार्डों को गोली से मार डाला गया. उनकी हत्या का इस रिहाई के ड्रामे में कोई उल्लेख नहीं आ रहा.

अब यह एक सिलसिला बन गया है जो चलता रहेगा. सरकारें नक्सलियों को पकड़ेंगी और नक्सली सरकार को इसी तरह पकड़ेंगे. रिहाई के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री व केन्द्रीय गृहमंत्री श्री चिदम्बरम से तथा मुख्यमंत्रियों के सम्मलेन में भी यह प्रश्न उठायेंगे कि इस तरह की ‘पकड़Ó पर कोई केन्द्रीय नीति बनाई जाए कि उस स्थिति में क्या किया जाए. यह अंदेशा पैदा हो गया है कि अब अन्य अपराधी भी सरकारी लोगों को पकड़कर अपने किसी साथी की रिहाई मांगेंगे. इस मामले में एक अधिकारी की हत्या भी हो चुकी है. दिल्ली में इस्लामी आतंकी मकबूल भट फांसी की सजा पाये हुए बन्द था. लन्दन… में भारतीय डिप्लोमेट प्रकाश म्हात्रे का अपहरण कर मकबूल भट की रिहाई मांगी गई. मांग न मानने पर म्हात्रे की हत्या कर दी गई. बाद में सकार ने मकबूल भट्टï को भी फांसी पर चढ़ा दिया. इन दिनों दिल्ली में अफजल गुरु और मुम्बई में कसाब फांसी की सजा पाये कैदी के रूप में बंद है. आतंकियों को व नक्सलियों को जेल में रखकर हम अपनी खुद मौत और मुसीबत को मोल ले रहे हैं. ”आओ… आतंकियों-नक्सलियों हमें पकड़़ो मार डालो.”

यह बहुत ही घटिया सिलसिला प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने अपनी 11 महीने की सरकार में शुरू किया. उनके गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद काश्मीर के थे. उनके पद पर आते ही श्रीनगर में उनकी बेटी राबिया को पकड़ लिया. फिरौती में 5 आतंकियों को छोड़ दिया. तब से यह सिलसिला बढ़ता हुआ चलता ही जा रहा है. वी.पी. सिंह के काल में एक एच.एम.टी. का मैनेजर पकड़ा और वाइस चांसलर पकड़ा गया. लेकिन सरकार ने आतंकियों के मांगे लोगों को नहीं छोड़ा और इन दोनों को मार दिया गया. इसके बाद प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी के काल में पाकिस्तानी आतंकियों ने विमान अपहरण का कंधार कांड कर डाला. सरकार ने आतंकी भी छोड़े और रुपयों में फिरौती भी अदा की.

इस मामले में हाल ही में एक ही साहसिक मिसाल आतंक के समाधान के रूप में सामने आई है. श्रीलंका के राष्टपति श्री महेंदा राजपक्षे ने 25 साल से चले आ रहे लिट्ट के आतंकवाद को फौजी कार्यवाही कर ….एक अभियान में जड़ मूल से खत्म कर दिया. आज वह शांति व सुकून में है. इस समस्या का निदान ‘पकड़’ में फिरौती में रिहाई देकर नहीं हो सकता. समाधान राष्टï्र की शक्ति से हो सकता है. लेकिन इस सबके बावजूद श्री चिदम्बरम ने यह ही कहा कि वे नक्सलियों से वार्ता करने को तैयार हैं और स्थिति यह है कि वे तैयार नहीं हैं.

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