पंजाबी फिल्म से जुडे लोगों की मानें तो भारत के विभाजन का पंजाबी सिनेमा उद्योग पर गहरा असर पडा था. पंजाबी फि़ल्म इंडस्टी और इससे जुडे अधिकतर लोग मुस्लिम थे जो विभाजन के बाद पाकिस्तान वाले पंजाब में चले गए. बहरहाल, पंजाबी फिल्मों के लिए यह साल शानदार रहा. इस साल करीब 18 फि़ल्में प्रदर्शित हुईं.

पंजाबी सिनमा उद्योग के लिए मौजूदा वर्ष खास रहा. इस साल पिछले कुछ सालों की अपेक्षा अधिक फिल्में प्रदर्शित हुईं जिनमें से कुछ फि़ल्में परंपरागत विषयों से हट कर राज्य की ज्वलंत समस्याओं पर बनी थीं. दर्शकों ने भी इन्हें खूब सराहा. पंजाबी फिल्म से जुडे लोगों की मानें तो भारत के विभाजन का पंजाबी सिनेमा उद्योग पर गहरा असर पडा था. पंजाबी फि़ल्म इंडस्टी और इससे जुडे अधिकतर लोग मुस्लिम थे जो विभाजन के बाद पाकिस्तान वाले पंजाब में चले गए. बहरहाल, पंजाबी फिल्मों के लिए यह साल शानदार रहा. इस साल करीब 18 फि़ ल्में प्रदर्शित हुईं. पंजाब की जल समस्या और सूबे के मालवा क्षेत्र में विषाक्त पानी के कारण लोगों में फ़ल रहे कैंसर जैसे विषय पर बनी द लॉयन ऑफ़  पंजाब को दर्शकों ने बहुत पसंद किया. साल 2009 में कुल 12 फिल्में प्रदर्शित हुई थी वहीं इसके पहले साल 13 फिल्में प्रदर्शित हुई थी जबकि 2007 में यह आंकडा महज तीन ही था. धनोआ का कहना है कि वर्ष दो हजार के दशक को पंजाबी फिल्मों के पुनरूद्धार का दशक कहा जा सकता है क्योंकि इन सालों में कुछ बडी बजट की फि़ ल्में भी बनीं.

उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि पिछले कुछ सालों में फिल्मों के बजट, और उनकी रिकवरी नहीं हो पाने के कारण पंजाबी फि़ ल्मों के निर्माण में कमी आयी थी लेकिन इस साल यह चढाव पर है और बालीवुड के स्थापित निर्देशक, कलाकार तथा निर्माता इसमें अब रूचि दिखा रहे हैं.पंजाबी सिनेमा के अतीत पर नजर डालें तो पता चलता है कि सत्तर के दशक में औसतन नौ फिल्में प्रदर्शित हुईं. अस्सी के दशक में यह औसत आठ और नब्बे के दशक में छह था. नयी शताब्दी के पहले दशक में इसमें इजाफ़ हुआ और अलग अलग विषयों पर बडे बजट की फिल्में बनने लगीं.

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