प्रधानमंत्री के निवास पर हुई बैठक में नहीं निकला हल

नई दिल्ली, 30 नवंबर.  एफडीआई को लेकर छिड़ी राजनीतिक लड़ाई में जहां प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह अडिग हैं और कांग्रेस उलझन में है, वहीं विपक्ष भी पूरी तरह अड़ गया है. सरकार के सहयोगी दल भी टस से मस होने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में तय माना जा रहा है कि गुरुवार को भी कामकाज ठप रहेगा. बाहर रिटेल एफडीआइ के खिलाफ गुरुवार को भारत बंद पर ट्रेडर यूनियनों के साथ तकरीबन सभी राजनीतिक दल खड़े हैं.

महंगाई एवं काला धन के मुद्दे पर बिखरा विपक्ष इस बार अड़ गया है. दरअसल सरकार को अंदर और बाहर से समर्थन दे रहे सहयोगी दलों के विरोधी तेवर ने उनका हौसला बढ़ा दिया है. बुधवार की सुबह हुई बैठक के बाद से सरकार की ओर से ठोस पहल न किए जाने से उनका गुस्सा बढ़ गया है.
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने सीधा आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के दबाव में यह फैसला लिया है. इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी सरकार को आगाह किया कि इस विवादित मामले को मनमाने ढंग से थोपा नहीं जा सकता है. ऐन वक्त पर सरकार ने बिना चर्चा फैसला ले लिया. तृणमूल ने गेंद कांग्रेस और भाजपा के पाले में डाल दिया.

बीजेपी ने सरकार के सुझाव को ठुकराया

बीजेपी ने रीटेल में एफडीआई के मुद्दे पर अपने कार्य स्थगन प्रस्ताव की शब्दावली को हल्का बनाने के सरकार के अनुरोध को खारिज कर दिया. मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि इस मुद्दे पर वह अपने रुख से पीछे नहीं हट सकता. मुख्य विपक्षी दल के अपने रुख पर अड़े रहने के चलते संसद में कल भी गतिरोध बना रह सकता है. मल्टिब्रैंड रिटेल में एफडीआई की अनुमति देने के मुद्दे पर संसद में गतिरोध दूर करने की कोशिश के तहत वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से बातचीत की. इसी बातचीत के दौरान बीजेपी ने इस मुद्दे पर अपने रुख से पीछे नहीं हटने की बात से मुखर्जी को अवगत करा दिया. भाजपा ने  आरोप लगाया कि सरकार ने यह निर्णय अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के दबाव में लिया है.  सुषमा स्वराज ने पूछा है कि सरकार मतदान के प्रावधान वाले नियम के तहत चर्चा कराने से दूर क्यों भाग रही है ?  हम रीटेल में एफडीआई पर अपने स्थगन प्रस्ताव पर संसद में चर्चा चाहते हैं.

सरकार चर्चा कराने और उसके बाद सदन में मतदान कराने से भाग क्यों रही है? इसका मतलब यह है कि इस मुद्दे पर संसद में सरकार के पास बहुमत नहीं है. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने मल्टी ब्रैंड रीटेल में एफडीआई को अनुमति देने के निर्णय को सरकार की ओर से की गई एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया बताया. जेटली ने पार्टी द्वारा जारी एक आलेख में कहा है, रीटेल में एफडीआई को केवल एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया के रूप में पेश नहीं किया जा सकता, क्योंकि सरकार ने लगभग आर्थिक सुधारों को ठंढे बस्ते में डाल दिया है.

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