आस्ट्रेलियाई सरजमीं पर तूती बोली है स्पिनरों की

नई दिल्ली,18 दिसंबर. आस्ट्रेलियाई पिचों को भले ही तेज गेंदबाजों के अनुकूल माना जाता हो और भारत का भरोसा भी आगामी श्रृंखला में तेज गेंदबाजों पर अधिक रहे लेकिन आकड़े बताते हैं कि आस्ट्रेलियाई सरजमीं पर भारतीय स्पिनरों का भी अच्छा खासा दबदबा रहा है.

चाहे वह बिशन सिंह बेदी, भगवत चंद्रशेखर और ईरापल्ली प्रसन्ना की स्पिन तिकड़ी हों या फिर अनिल कुंबले, भारतीय स्पिनरों ने लगभग हर श्रृंखला में आस्ट्रेलियाई धरती पर अपनी विशेष छाप छोड़ी है और इस लिहाज से वर्तमान दौरे में रविचंद्रन अश्विन और प्रज्ञान ओझा पर काफी दारोमदार होगा.  भारत ने 1947- 48 में पहली बार आस्ट्रेलिया दौरा किया. तब से लेकर 2007- 08 भारत ने आस्ट्रेलियाई सरजमीं पर जो 36 टेस्ट मैच खेले उनमें उसने तेज और मध्यम गति के 28 गेंदबाजों को आजमाया जिनमें से 23 गेंदबाज विकेट लेने में सफल रहे. इन गेंदबाजों के नाम पर अब तक कुल 266 विकेट दर्ज हैं. कपिल देव ने आस्ट्रेलिया में 11 मैच खेलकर सर्वाधिक 51 विकेट लिए हैं. यदि स्पिनरों की बात करें तो भारत ने आस्ट्रेलिया में खेले गए इन मैचों में 27 स्पिनर या कामचलाऊ स्पिनर आजमाए जिनमें से 18 गेंदबाजों के नाम पर 250 विकेट दर्ज हैं. अनिल कुंबले ने दस मैच में 49 विकेट हासिल किए हैं. उनके बाद बेदी 35 विकेट , प्रसन्ना 31 विकेट , चंद्रशेखर 29 विकेट : और शिवलाल यादव 23 विकेट का नंबर आता है.

आस्ट्रेलियाई दौरे पर गई भारतीय टीम में दो तेज गेंदबाज ही ऐसे हैं जो इससे पहले वहा खेल चुके हैं. इनमें से जहीर खान ने तीन मैच में 40.00 की औसत से दस विकेट जबकि इशात शर्मा ने तीन मैच में 59. 66 की औसत से छह विकेट लिए हैं. ये दोनों अभी चोटों से परेशान हैं. भारत के दोनों विशेषज्ञ स्पिनरों अश्विन और ओझा का यह पहला आस्ट्रेलियाई दौरा है. उन्हें हरभजन सिंह पर तरजीह दी गई. इसका कारण हरभजन की हाल की लचर फार्म के अलावा आस्ट्रेलिया में उनका खराब प्रदर्शन हो सकता है. हरभजन ने आस्ट्रेलियाई सरजमीं पर चार टेस्ट मैच में 72. 33 की औसत से केवल नौ विकेट लिए हैं. भारतीय टीम में शामिल अश्विन आफ स्पिनर और ओझा बाएं हाथ के स्पिनर हैं. ओझा बाएं हाथ के नौवें भारतीय स्पिनर होंगे जो आस्ट्रेलिया में खेलेंगे. इससे पहले भारत ने बाएं हाथ के जिन आठ स्पिनरों का उपयोग किया उनके नाम पर 90 विकेट दर्ज हैं. इनमें बेदी के अलावा रवि शास्त्री 19, वीनू माकड़ 12, दिलीप दोषी 11 और वेंकटपति राजू 9 प्रमुख हैं. आस्ट्रेलिया में भारत ने अब तक पाच टेस्ट मैच जीते हैं और इनमें स्पिनरों का खास योगदान रहा है. इन पाच मैच में जहा तेज गेंदबाज 45 विकेट ही ले पाए वहीं स्पिनरों ने 55 विकेट चटकाए. भारतीय गेंदबाजों में मध्यम गति के गेंदबाज करसन घावरी सबसे ज्यादा तीन ऐसे मैच में खेले जिनमें भारत ने जीत दर्ज की. इन मैच में उन्होंने हालाकि केवल छह विकेट लिए. भारत जिन मैचों में जीता उनमें से चंद्रशेखर ने दो मैच में 18, बेदी ने दो मैच में 11, कुंबले ने दो मैच में दस, अजित अगरकर ने एक मैच में आठ, कपिल ने एक मैच में छह, इरफान पठान ने दो मैच में छह और आरपी सिंह ने एक मैच में छह विकेट लिए.

भारत ने आस्ट्रेलिया में 22 मैच गंवाए हैं और इन मैचों में तेज गेंदबाजों की तुलना में स्पिनरों का प्रदर्शन खराब रहा था. आस्ट्रेलिया के अधिकतर दौरों में भारतीय स्पिन गेंदबाजों का साथी तेज गेंदबाजों पर दबदबा भी रहा. संयोग से जब तेज गेंदबाजों ने स्पिनरों से अच्छा प्रदर्शन किया तब टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. यदि भारत की 1977- 78 में आस्ट्रेलिया में पहली जीत के बाद देखा जाए तो स्पिनरों ने वहा भारत के पक्ष में सकारात्मक परिणाम में अहम भूमिका निभाई. भारत ने 1977- 78 में दो मैच जीते थे हालाकि वह श्रृंखला 2-3 से गंवा बैठा था. तब बेदी ने 31 और चंद्रा ने 28 विकेट लिए थे. इसके बाद 1980- 81 में जब श्रृंखला 1-1 से बराबर रही तो कपिल 14 और घावरी 10 के साथ दिलीप दोषी 11 ने भी बराबर का योगदान दिया था. शिवलाल यादव 15 विकेट और शास्त्री 14 विकेट ने 1985- 86 की श्रृंखला 0-0 से ड्रा कराने में अहम भूमिका निभाई थी. भारत 1991- 92 में 0-4 से श्रृंखला हार गया था और तब भारत की तरफ से सर्वाधिक विकेट तीन तेज गेंदबाजों कपिल 25, मनोज प्रभाकर 19 और जवागल श्रीनाथ 10 विकेट ने लिए थे. स्पिनर राजू और शास्त्री उस श्रृंखला में नहीं चल पाए थे. भारत के मुख्य स्पिनर कुंबले 1999 . 2000 में नहीं चल पाए थे और टीम 0-3 से श्रृंखला हार गई थी. कुंबले ने हालाकि 2003- 04 में तीन मैच में 24 विकेट चटकाए और भारत श्रृंखला 1-1 से बराबर करने में सफल रहा. इसके बाद 2007- 08 में भी उन्होंने चार मैच में सर्वाधिक 20 विकेट लिए थे और भारत एक मैच जीतने में सफल रहा था. आस्ट्रेलिया ने विवादों से घिरी यह श्रृंखला 2-1 से जीती थी.

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