कैग की तीन रिपोर्टों ने किया धमाका

कोयले में सरकार को 1.86 लाख करोड़ की चपत

नयी दिल्ली, 17 अगस्त. नससे. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की कोयला, अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (यूएमपीपी) और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से संबंधित रिपोर्टों में ढाई लाख करोड रुपए के राजस्व की गडबडियों को उजागर किया गया है .

वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने आज संसद में बहुचर्चित कोयला ब्लाक आवंटन . यूएमपीपी और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड.डायल. को सौंपे जाने के संबंध में कैग की तीन रिपोर्ट पटल पर रखी. इनमें निजी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी निविदा के जरिये कोयला ब्लाक आवंटन नीलामी से नहीं किए जाने के कारण अब तक के सबसे बडे घोटाले से सरकार को 1.86 लाख करोड रुपए के राजस्व नुकसान का उल्लेख है.कैग ने अपनी प्रारुप रिपोर्ट में दस लाख करोड रुपए के नुकसान होने की बात कही थी . सीएजी की रिपोर्ट पेश होते ही संसद के दोनों सदनों में हंगामा हो गया. कोयला घोटाले में कथित भूमिका को लेकर भाजपा ने प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की है. साथ ही पीएमओ की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किया है. भाजपा ने कहा यूपीए 2 के घोटालों की कड़ी में यह सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है. उधर सरकार का बचाव करते हुए पीएमओ  में राज्यमंत्री जी वेंकटसामी ने कोयला खान आवंटन पर रिपोर्ट को प्रारंभिक बताया और कहा कि लोकलेखा समिति द्वारा इसकी समीक्षा करने के बाद ही इस संबंध में कोई कार्रवाई की ज सकेगी.

महाराजा से भिखारी पटेल जिम्मेदार !

पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल एक बार फिर बड़ी मुश्किल में फंस सकते हैं। महाराजा से भिखारी बन चुकी इंडियन एयरलाइंस की इस हालत के लिए पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल को जिम्मेदार ठहराया गया है। इंडियन एयरलाइंस (एआइ) के पूर्व प्रमुख संजीव अरोड़ा ने वर्ष 2005 में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बीके चतुर्वेदी को चिट्ठी लिखकर प्रफुल्ल पटेल की शिकायत की थी। उन्होंने पटेल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने एआइ की वित्ती हालत को नुकसान पहुंचाने वाले कई फैसले लेने के लिए उन्हें और एआइ बोर्ड को मजबूर किया था।

यह चिट्ठी सामने आने के बाद अब लोकसभा में विपक्ष के दो सांसद प्रबोध पांडा (सीपीआइ) और निशिकांत दुबे (भाजपा) ने सीवीसी से संजीव अरोड़ा के आरोपों की जांच कराने को कहा है। पटेल पर मुख्य आरोप है कि इंडियन एयरलाइंस को फायदा पहुंचाने वाले रूट पर जाने से रोका गया। खासकर इस पूरी प्रक्रिया में अन्य प्राइवेट एयरलाइंस को फायदा पहुंचाया गया। इसके अलावा अरोड़ा ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल के कार्यकाल में जरूरत से ज्यादा ही जेट खरीदे गए। और साथ ही कुछ जेट निर्माता कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। यह सब बोर्ड मीटिंग के बहाने किया गया। एआइ की बोर्ड मीटिंग से पहले ही फैसला कर लिया जाता था और फोन पर मौखिक रूप से प्रबंधन को आदेश दे दिया जाता था। भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे मुद्दों पर पहले से निशाने पर रही यूपीए सरकार को यह चोट भी गहरा जख्म देगी इससे इन्कार नहीं किया जा सकता।

सहमत नहीं

कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने भी सरकार का पक्ष लेते हुए कहा कि रिपोर्ट में नुकसान का जो आंकडा निकाला गया है सरकार उससे कतई सहमत नहीं है . उन्होंने कहा कि इस मामले की केन्द्रीय जांच ब्यूरो.सीबीआई. पहले से ही जांच कर रही है . जांच में जो भी दोषी पाया जायेगा उसे कठोर से कठोर सजा दी जायेगी . श्री जायवाल ने कहा कि कोयला ब्लाक आवंटन में पूरी तरह से पारदर्शिता अपनाई गई और इससे बेहतर विकल्प नहीं था .

श्री जायसवाल ने कहा कि कोयला ब्लाक आवंटन के बारे में कैग का जो आकलन है उससे उनका मंत्रालय सहमत नहीं है. उन्होंने कहा कि कोयले की खान में कितनी दूर तक खनिज होगा तथा खान की सीम कैसी होगी इस सबको देखते इस तरह का आकलन कैसे किया गया. उन्होंने कहा कि केवल औसत के आधार किसी आंकडे पर पहुंचने से वह सहमत नहीं है.
कोयला मंत्री ने कहा कि इसके अलावा कैग ने जिन 57 ब्लाकों के आवंटन पर आपत्ति उठायी है उनमें से अभी सिर्फ एक ब्लाक चालू हो सका है 1 जब 56 ब्लाक में से कोयला निकालने का काम शुरु नहीं हुआ है तो कैसे उससे नुकसान फायदे का आकलन हो सकता है1 उन्होंने कहा कि सरकार ने आवंटन की जो नीति और प्रक्रिया बनायी वह पूरी तरह पारदर्शी थी तथा उससे बेहतर कुछ और नहीं हो सकता था. उन्होंने कहा कि अगर यह प्रक्रिया नहीं अपनायी गयी होती तो देश में न तो कोयले का उत्पादन बढता. न विकास की गति तेज होती और न ही देश की समस्याओं का निवारण हो सकता.

इस ओर ध्यान दिलाये जाने पर कि सरकार ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में 1.76 लाख करोड का नुकसान होने के कैग के अनुमान को गलत ठहराया था तथा अब वह कोयला ब्लाक आवंटन में उसके आकलन को गलत ठहरा रही है तो फिर सरकार और कैग में दोषी कौन है . श्री जायसवाल ने कहा कि दोनों में दोषी कोई नहीं है1 कैग का काम लेखा परीक्ष करना है जबकि सरकार का काम सवा अरब लोगों की जरुरतों के अनुरप काम करना है1

प्रतिस्पर्धी बोली के जरिये आवंटन करने में विलंब के लिये उन्होंने राज्यों को दोषी ठहराया और कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली राजस्थान और छत्तीसगढ की सरकारों तथा पश्चिम बंगाल की वाममोर्चा सरकार ने इसका कडा विरोध किया था और संघीय व्यवस्था में राज्यों की भावना की अवहेलना नहीं की जा सकती1 उन्होंने कहा कि वह राज्यों को इस प्रकिया पर इस शर्त पर सहमति जुटा सके कि इससे मिलने वाला पूरा राजस्व उन्हें दे दिया जायेगा1

कोयला ब्लाक आवंटन में गडबडी को लेकर भाजपा की प्रधानमंत्री मनमोहन ंसिह के इस्तीफे की मांग के संबंध में उन्होंने कहाकि पिछले तीन वर्ष में प्रधानमंत्री का 30 बार इस्तीफा मांगा जा चुका है1 इस्तीफा मांगना इतनी सस्ती राजनीति हो गयी है कि उसका कोई महत्व नहीं रह गया है1

बीजेपी सरकारें भी जिम्मेदार

सरकार ने कैग की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि इस बारे में सरकार की नीति पारदर्शी थी और उसमें कुछ गलत नहीं हुआ। कोल ब्लॉक आवंटन इससे बेहतर तरीके से नहीं हो सकता था। कई राज्य सरकारों ने भी टेंडर पॉलिसी का विरोध किया था। विरोध करने वालों में राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल की सरकारें थीं।  इन राज्यों में बीजेपी व लेफ्ट सरकारें थी. सरकारों का कहना था कि टेंडर की प्रक्रिया से कोयले की कीमत बढ़ जाएगी और और बिजली भी महंगी हो जाएगी, जो आम जनता के हित में नहीं है। गौरतलब है कि उस वक्त राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार और पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार थी।

पीएम इस्तीफा दें

भाजपा ने कोयला ब्लाक आवंटन में कथित अनियमितताओं के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राजनीतिक और नैतिक तौर पर सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की है. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा कि यह घोटाला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन .संप्रग. सरकार के भ्रष्टाचार के रिकार्ड का एक और अध्याय है. श्रीमती स्वराज ने कहा.. कैग की रिपोर्ट 11 मई को सरकार को सौंपी गई थी और कायदे से इसे संसद के पिछले सत्र में ही पेश किया जाना चाहिए था लेकिन सरकार ने इसमें देरी की1 इस रिपोर्ट ने सरकार के भ्रष्टाचार के रिकार्ड में एक और अध्याय जोड दिया है1 उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पिछले पांच वर्षों से कोयला मंत्रालय का काम देख रहे हैं इसलिए आवंटन संबंधी अनियमितताओं के लिए वह सीधे जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि संप्रग का दूसरा कार्यकाल घोटाला और भ्रष्टाचार से भरा रहा है और कोयला घोटाला इस कार्यकाल का सबसे बडा घोटाला है. श्रीमती स्वराज ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने कोयला ब्लाकों की नीलामी के आधार पर आवंटन में बाधा पहुंचाई तथा इनका आवंटन विवेक के आधार पर किया गया.

कहां कैसे लगा चूना

कोयला ब्लॉक आवंटन

कार्पोरेट घरानों को कोयले की खानों को सरकार ने कौडिय़ों के भाव बेच दी जिससे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ. वर्ष 2004 से 2006 के बीच कोयला खदानों के आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरती गई. 2004-06 के बीच 142 कोल ब्लॉक बांटे गए. इस दौरान कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास था. रिपोर्ट के मुताबिक इस बंदरबांट में टाटा ग्रुप, नवीन जिंदल ग्रुप, एस्सार, वेदांता ग्रुप, अभिजीत ग्रुप और लक्ष्मी मित्तल आर्सेलर को भी फायदा हुआ.

सिविल एविएशन

कैग ने तत्कालीन विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके दौर में मंत्रालय ने दिल्ली एयरपोर्ट बनाने वाली कंपनी जीएमआर को 3400 करोड़ का फायदा पहुंचाया. कैग ने दिल्ली एयरपोर्ट संचालित करने वाली कंपनी डायल पर नियमों के खिलाफ डेवलेपमेंट फीस वसूलने का आरोप लगाया है. साथ ही करीब 239 एकड़ अतिरिक्त जमीन सिर्फ 31 लाख रुपए के एकमुश्त भुगतान और महज 100 रुपए सालाना की लीज पर जीएमआर के हवाले कर दी. इस जमीन की औसत बाजार कीमत करीब 24000 करोड़ रुपए है.

मेगा पावर प्रोजेक्ट

कैग ने सरकार पर टाटा पावर और रिलायंस पॉवर को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है. कैग की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने रिलायंस पॉवर को सासन प्रोजेक्ट के लिए आवंटित तीन ब्लॉक से तय मात्रा से कहीं ज्यादा कोयला निकालने की इजाजत दी . जिससे इससे रिलायंस पॉवर को तकरीबन 29003 करोड़ का फायदा हुआ.

Related Posts: