इस्लामाबाद, 20 दिसंबर. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने सैन्य तख्तापलट की अफवाहों को खारिज करने की कोशिश के तहत कहा है कि देश में सैन्य शासन नहीं होगा.

गिलानी ने कहा कि देश में कोई सैन्य शासन या कोई कार्यवाहक सरकार नहीं होगी, क्योंकि नागरिक समाज और मीडिया सहित कोई भी उसे स्वीकार नहीं करेगा. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हृदय की बीमारी का इलाज कराने अचानक दुबई चले जाने से सैन्य तख्तापलट की अफवाह पैदा हो गई थी. यद्यपि जरदारी रविवार देर शाम पाकिस्तान लौट आए, फिर भी वाशिंगटन भेजे गए गुप्त संदेश को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. गुप्त संदेश में कहा गया था कि जरदारी को, दो मई को अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के ऐबटाबाद में मारे जाने के बाद सैन्य तख्तापलट की आशंका थी. पाकिस्तान की सरकारी समाचार एजेंसी, एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान ने गिलानी के हवाले से कहा है कि हमें ऐसे मौके नहीं मुहैया कराने चाहिए, जिससे लोकतंत्र पटरी से उतर जाए. गिलानी ने लोकतंत्र के समर्थन में बयान देने के लिए विपक्षी नेता नवाज शरीफ की प्रशंसा की. सीमा समन्वय केंद्र बंद नहीं किए गए हैं  पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि उसने अफगानिस्तान से सटे अपने सीमा समन्वय केंद्रों को बंद नहीं किया है. पाकिस्तान की ओर से यह स्पष्टीकरण नवंबर में उसकी दो सीमा चौकियों पर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन [नाटो] के हमले के बाद इस सम्बंध में उठ रही अटकलों के संदर्भ में आया है, जिसमें 24 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे. एसोसिएट प्रेस ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, यह धारणा गलत है कि सीमा समन्वय केंद्रों को बंद कर दिया गया है और वहां से सेना के अधिकारियों को बुला लिया गया है. इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कुछ अधिकारियों को बुलाया गया है, लेकिन सिर्फ पूछताछ के लिए. उन्हे सीमा समन्वय केंद्रों पर भेजा जा चुका है.

Related Posts: