भोपाल, 13 दिसंबर. किशोर प्रजनन स्वास्थ्य के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिये किशोर-किशोरियों पर केंद्रित स्वास्थ्य कार्यक्रम बहुत ही जरूरी है. गांव में अलग-अलग समितियों के गठन के बजाय एक ही समिति को तदर्थ समिति मानकर उसी के माध्यम से कार्य करना चाहिये ताकि गांव स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर प्रबंधन हो सके.

यह बात आज राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के संचालक डॉ. मनोहर अगनानी ने स्वयंसेवी संस्था समर्थन द्वारा यूएनएफपीए के सहयोग से ‘किशोर प्रजनन स्वास्थ्य: चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के अंतिम सत्र में विशिष्टï अतिथि के रूप में कही. उन्होंने कहा कि आशा के प्रशिक्षण में व्यापक सुधार किया जा रहा है और उसे समुदाय एवं स्वास्थ्य विभाग की कड़ी के रूप में ज्यादा सक्षम बनाया जा रहा है. स्वास्थ्य सेवाओं को गांव तक पहुंचाने एवं गुणवत्ता में सुधार चुनौती है, जिसे दूर करने के प्रयास किये जा रहे हैं. कार्यशाला में इस बात पर विचार किया गया कि अलग-अलग राज्यों में किशोर एवं प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर जो सफल प्रयोग किये गये हैं उन्हें मध्यप्रदेश में भी लागू किया जाना चाहिये. जन स्वास्थ्य अभियान के राहुल शर्मा ने कहा कि शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू कर किशोरों की स्वास्थ्य समस्याओं का हल करना चाहिये. समर्थन संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. योगेश कुमार ने कहा कि एकीकृत तरीके से सभी प्रयासों को अपनाने के साथ-साथ कुछ गांवों में समग्र स्वास्थ्य पर कार्य करके मॉडल विकसित करने की जरूरत है. महिला जनप्रतिनिधियों, महिला शिक्षिकाओं को भी इस कार्यक्रम से जोडऩा चाहिये क्योंकि वे किशोरियों को बेहतर तरीके से शिक्षित कर सकती हैं. आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की गुणवत्ता में भी सुधार की जरूरत है.

‘समुदाय में कार्य: प्रजनन स्वास्थ्य पर हस्तक्षेप’ विषय पर जतन संस्थान उदयपुर के कैलाश बृजवासी ने बताया कि उनके यहां प्रवासी युवाओं पर कार्य किया जा रहा है. उनके स्वास्थ्य कार्ड बनाये जाते हैं. महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन की प्रो. डॉ. चेतना मालिये ने कहा कि उनकी संस्था ने किशोरी पंचायत बनाकर गांव की सभी किशोरियों को जोड़ा है, जो उनकी स्वास्थ्य समस्याओं एवं जीवन कौशल पर बहुत ही सक्षम तरीके से कार्य कर रहा है. ‘किशोरों एवं विवाहित महिलाओं द्वारा प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग’ विषय श्रमिक भारती कानपुर की प्रोग्राम मैनेजर साधना घोष ने बताया कि नव दम्पत्तियों पर कार्य करने से मातृ मृत्यु रोकने एवं अन्य समस्याओं को हल करने में मदद मिली है. फेमिली प्लानिंग एसोसिएशन के ओ.पी. चौहान ने भी जोर दिया कि आदिवासी बहुल एवं अन्य जगहों पर अलग-अलग तरीके से क्रियान्वयन किया जाना चाहिये.

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