भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है

भोपाल, 15 दिसंबर. 17वीं शताब्दी में सन् 1555 में फ्रांसिसी भविष्य वक्ता नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणी की थी एक धूमकेतु पृथ्वी सेट करायेगा और सन् 2012 में दुनिया का अंत हो जायेगा एक और भविष्य दानिप्येल ने भी 2012 में दुनिया समाप्ति की बात कही है.

साथ ही माया सभ्यता केलेण्डर के अनुसार तो 21 दिसंबर 2012 को सृष्टि के अंतिम दिन की तारीख भी तय कर दी है. एक विदेशी वैज्ञानिक के अनुसार तो प्रत्येक 11 वर्षों में एक बार मौत का मौसम आता है. इनके अनुसार 11 वर्ष पहले 2001 में कई मौते हुई थी. 2012 में भी मौत का मौसम आयेगा. ज्योतिषाचार्य पं. धर्मेन्द्र शास्त्री के अनुसार भारतीय ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कोई भी ग्रह योग 2012 में नहीं बन रहे है, जिसके कारण दुनिया के अंत की भविष्यवाणी की जा सके. अत: वर्ष 2012 में प्रलय नहीं आयेगा, सृष्टि सुरक्षित रहेगी. 2012 में 22 मार्च तक विक्रम संवत् 2068 का स्वामी चन्द्रमा है जोकि उन्नति एवं प्रगतिकारक है. इसके पश्चात 23 मार्च 2012 से विक्रम संवत 2069 का स्वामी शुक्र है जोकि समृद्घि का कारक होगा, इसलिये 2012 में दुनिया का अंत नहीं होगा. प्राचीन शास्त्रों की कालगणना के अनुसार 1 महायुग में चार युग पूर्ण होने पर ही महाप्रलय होता है. 4,26,887 वर्ष कलियुग के अभी शेष बचे है, इनके पूर्ण होने पर ही माह प्रलय होगा.

क्या होगा सन् 2012 में

वर्ष 2012 में भारत का भाग्योदय होना है. लेकिन भारत सहित कई देशों में राजनैतिक आर्थिक अस्थिरता रहेगी. हिंसा, अशांति एवं अपराधों में वृद्घि होगी. किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है. चक्रवात, तूफान, भूकम्प आदि प्राकृतिक प्रकोंपों से जनधन हानि होगी. रेल, सड़क एवं यान दुर्घटना हो सकती है. भारत के खिलाड़ी मान सम्मान प्राप्त करेंगे. किसी विशिष्ट राजनेता को भारत खो सकता है.

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