6 अगस्त 2012 को अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था नासा का मंगल ग्रह यान ”क्यूरोसिटीÓÓ सुबह लगभग 8 बजे वहां उतर गया. मंगल ग्रह के बारे में धारणा है कि यह बिल्कुल पृथ्वी के समान है. यहां हवा-पानी व मानव जीवन पाने की संभावना है. सौर मंडल में यह पृथ्वी का पड़ोसी ग्रह है. यह धारणा है कि कभी यह दोनों अरबों-खरबों साल पहले एक ग्रह थे और विभक्त होकर दो बने हैं. पृथ्वी सूर्य से 93 मिलियन मील और मंगल 142 मिलीयन मील दूर है. पृथ्वी और मंगल की एक-दूसरे से दूरी 49 मिलियन मील है. अपनी धुरी पर घूमने की गति पृथ्वी और मंगल की एक सी 24 घंटे 37 मिनिट है. मंगल सूर्य की परिधि 687 दिन में पूरी करता है. यही इसका वार्षिक समय है. यह लाल रंग का चट्टानों, रेत व मिट्टी का बना है. पृथ्वी का निर्माण भी इन्हीं तत्वों का है.

भारत में मात्र उज्जैन में एक मंगल मंदिर है और धारणा है कि यहां से मंगल ग्रह पृथ्वी से सबसे नजदीक है और यहीं से विभक्त होकर वह दूसरा ग्रह बना था. उज्जैन वैदिक काल में ज्योतिष नगर रहा है. हमें सौर मंडल के सभी ग्रहों की जानकारी भी थी और उनके नाम भी दिये गये थे. लेकिन वैदिक ज्ञान में विज्ञान नहीं था. धार्मिक आस्थाएं थी इसलिये ग्रहों का मानवीकरण करके उन्हें देवता स्वरूप में माना गया और उनके प्रभावों को मानव पर ढाला गया. इसलिए आज की अंतरिक्ष खोज में वैदिक ज्ञान अप्रासंगिक है. जैसे आज के हवाई जहाज को पुष्पक विमान का ज्ञान नहीं माना जा सकता. उसका श्रेय राइट ब्रदर्स को ही है.
मंगल की जानकारी सबसे पहले नासा ने 1965 मेरीनियर 4 से प्राप्त की और फोटो लिए. सन् 1969 मेरीनियर 6 व 7 ने और ज्यादा फोटो भेजे. मेरीनियर 9 को मंगल की कक्षा में स्थापित कर और करीब से अध्ययन किया गया.

रूस ने मंगल पर एक प्रोब यान उतारा था लेकिन यह 20 सैकण्ड ही काम करके असफल रहा. 1976 में अमेरिका ने वीकिंग 1 और वीकिंग 2 नाम के यान उतारे थे. नासा का वर्तमान मंगल यान क्यूरोसिटी एक तरह का रोबोट है. यह कार के आकार के का है और नवंबर 2011 में नासा अंतरिक्ष केंद्र से मंगल के लिये छोड़ा गया था. यह 9 महीनों में 24 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय कर 6 अगस्त 2012 की सुबह मंगल ग्रह पर उतरा. मंगल ग्रह की खोज का यह अब तक का सबसे बड़ा और सफल प्रयास है. यह कई नई जानकारियां प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ भेजा गया है. इसका सबसे बड़ा मिशन मंगल ग्रह पर सूक्ष्म जीवन का पता लगाना है.

यह वहां की मिट्टी के नमूने लायेगा. इससे पहले सन् 60 के दशक में नील आम्र्स स्ट्रांग टीम द्वारा चंद्रमा पर प्रथम मानव पहुंचाने पर ये टीम वहां से एक किट मिट्टी भी भरकर लायी थी. मंगल अभियान में यह काम रोबोट कर रहा है. कार्यक्रम के अनुसार क्यूरोसिटी यान 4 महीने तक अपना काम करेगा. यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो यह एक साल तक काम करेगा. मंगल का साल पृथ्वी के 22 महीनों के बराबर होता है. इस यान को बनाने में 10 साल लगे और 2.5 अरब डालर का खर्च आया.

भारत भी इसरो नाम की अंतरिक्ष खोज की संस्था बना कर इसमें आगे बढ़ रहा है. इसरो व नासा का आपस में घनिष्ठï संबंध है. कई भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक नासा में कार्यरत् है. उसमें कल्पना चावला थी जो अंतरिक्ष दुर्घटना में बलि चढ़ गई. इन दिनों भारतीय मूल की गुजराती महिला सुनीता विलियम्स भी अंतरिक्ष में दूसरी बार गयी हुई है और अभी वहां ही है. इसी 3 अगस्त को केंदीय मंत्री मंडल ने अंतरिक्ष विभाग की अनुशंसा पर मंगल अभियान को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी गई. धार्मिक आस्थाओं व वैदिक ज्ञान के अतिरिक्त भी उज्जैन के मंगल मंदिर व मंगल ग्रह की प्राचीन मान्यताओं की वैज्ञानिक परख भी की जानी चाहिए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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