नई दिल्ली, 17 फरवरी.  अगर आप जानना चाहते हैं कि आप कब तक जिएंगे और आपकी उम्र बढऩे की रफ्तार क्या होगी यानी आप कब तक बूढ़े होंगे, तो आपकी यह तमन्ना जल्द ही पूरी होने वाली है. एक सामान्य सा ब्लड टेस्ट आपके ऐसे सभी सवालों का जवाब दे देगा. इस ब्लड टेस्ट में टेलोमिअर्स की पड़ताल के आधार पर यह नतीजा निकाला जाता है कि व्यक्ति की बायलॉजिकल ऐज क्या होगी.

यह टेस्ट भारत में इसी साल मुहैया होने लगेंगे. टेलोमिअर्स वे प्रोटेक्टिव कैप्स हैं जो क्रोमोसोम्स के अंत में पाई जाती हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इनकी लंबाई के आधार पर व्यक्ति की जैविक उम्र का पता लगाया जा सकता है. साइंटिस्ट्स ने पाया कि व्यक्ति के छोटे टेलोमिअर्स की जांच परख से यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति की उम्र बढऩे के साथ-साथ उसके शरीर में क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं, जैसे कैंसर, कार्डियो बीमारियां और ऐल्टशाइमजऱ् के बारे में इससे पता लगाया जा सकता है. यहां दीगर बात यह है कि लोगों की लाइस्टाइल संबंधी आदतें जैसे मोटापा और एक्सरसाइजिंग से टेलोमिअर्स की लंबाई पर असर पड़ रहा है. टेलोमिअर्स के क्रोमोसोम्स को प्रोटेक्ट करने वाली खोज को 2009 में नोबेल प्राइज मिला था. इस ब्लड टेस्ट को अंजाम देने वाली टीम के महत्वपूर्ण सदस्य यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की सेल बायॉलजी के प्रफेसर डॉक्टर जेरी शेय का कहना है, भारत में भी अब लोग हेल्थी लिविंग को लेकर सजग हैं. लोग जानना चाहते हैं कि उनकी कोशिकाएं (सेल्स) कितनी हेल्थी हैं और वह कितना जिएगा. इस ब्लड टेस्ट से टेलोमिअर्स की लंबाई का पता चलेगा. वैसे टेस्ट थोड़ा महंगा होगा और इसके लिए आपको 500 डॉलर यानी 25 हजार रुपए खर्चने होंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि बायलॉजिकल उम्र क्रॉनोलॉजिकल ऐज से ज्यादा मायने रखती है. कई बार देखा गया है कि लोग अपनी उम्र से ज्यादा जवान लगते हैं. डॉक्टर शेय लाइफ लेंथ नाम की स्पेन की टेलोमिअर टेस्टिंग कंपनी से जुड़े हैं. उनका कहना है, टेलोमिअर किसी कोशिश के जीवन की घड़ी के तौर पर काम करता है. टेलोमिअर्स की लंबाई के घटने का अर्थ यह होगा कि व्यक्ति की कोशिका की उम्र घट रही है.

लंबे टेलोमिअर्स का मतलब हुआ, स्वस्थ्य और लंबा जीवन.

उन्होंने बताया कि हर बच्चा 23 क्रोमोसोम अपनी मां से और 23 ही अपने पिता से ग्रहण करता है. हर क्रोमोसोम के अंत में 92 टेलोमिअर्स होते हैं. टेलोमिअर्स ऐसे हैं जैसे जूते के तमगे के अंत में प्लास्टिक की कैप जैसा कुछ होता है. इस ब्लड टेस्ट के जरिए दिल के दौरे और ऐसी ही कुछ आकस्मिक मौतों के बारे में पता लगाया जा सकता है. 19 सालों तक इस बाबत स्टडी की गई और नतीजे यही कह रहे थे कि यदि टेलोमिअर्स छोटे हैं तो हार्ट अटैक और कम उम्र में मौत का खतरा क्रमश: 50 फीसदी और 25 फीसदी तक बढ़ जाता है.

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