चेन्नई, 26 दिसंबर. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बात पर चिंता जताई है कि गणित में आगे बढऩे की स्वाभाविक क्षमता के बावजूद युवा इस विषय में आगे की पढ़ाई जारी नहीं रखते हैं. इसके परिणामस्वरूप स्कूल व कॉलेज स्तर पर गणित के अच्छे शिक्षकों की कमी हो रही है.

सिंह ने प्रख्यात गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की 125वें जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में उद्घाटन उद्बोधन देते हुए कहा, ‘यह एक आम धारणा बन गई है कि गणित की पढ़ाई करने से करियर में आकर्षक सम्भावनाएं नहीं मिलतीं.’ उन्होंने साल 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित किया और रामानुजन के जन्म के दिन मतलब 22 दिसम्बर को गणित दिवस घोषित किया. पीएम ने कहा, ‘गणितज्ञों के समुदाय की यह जिम्मेदारी है कि वे देश में अच्छी गुणवत्ता वाले गणितज्ञों की कमी को दूर करने के रास्ते तलाशें. गणित विषय की जनता तक पहुंच निश्चित रूप से जरूरी है क्योंकि खासकर आधुनिक संदर्भों में मानवीय उद्यमों पर गणित का जबरदस्त प्रभाव है.’

2012 राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अगले वर्ष 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष और 22 दिसम्बर को गणित दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। इसी दिन देश के महान गणितज्ञ  प्रधानमंत्री ने कहा, पांचवीं शताब्दी में पैदा हुए आर्यभट्ट और उसके बाद ब्रह्मगुप्त को दुनिया के महानतम गणितज्ञ के रूप में जाना जाता है। हमने दुनिया को शून्य की समझ दी तथा 10 अंकों के साथ सभी अंकों को अभिव्यक्त करने का आधुनिक तरीका सिखाया। उन्होंने कहा कि आर्यभट्ट के बाद लगभग एक हजार सालों तक भारत ने दुनिया को गणित के क्षेत्र में नेतृत्व दिया। उन्होंने कैलकुलस के क्षेत्र में माधव के योगदान की भी चर्चा की। उन्होंने आगे कहा कि इसके लम्बे समय के बाद 20वीं शताब्दी के दूसरे दशक में भारत ने फिर एक बार रामानुजन के रूप में विश्वस्तरीय गणितज्ञ पैदा करने की क्षमता साबित कर दी।

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